lets Try prayash

माई कम्प्यूटर नोट्स
बृजबिहारी कुशवाह (पोपील सर)
डायरेक्टरः-मल्टीटेक कम्प्यूटर्स
बोरखेड़ा, कोटा
तृतीय संस्करण-2019
प्रतियाॅ-1000
मूल्य: 170/-
लेखन एवं प्रकाशक
मल्टीटेक कम्प्यूटर्स
बस-स्टेण्ड़ की गली बोरखेड़ा, कोटा
मो.-9829320065
www.multitechcomputers.org
www.shopadd.in
वितरक
मल्टीटेक कम्प्यूटर्स,
लाजपत नगर- द्वितीय,बोरखेड़ा, कोटा।
मो.-9829320065
मुद्रक
कंचन प्रिंटर्स, केशवपुरा, कोटा
।। ॐ गं गणपतेः नमः।।
।। श्री सरस्वत्यै नमः।।
।। ॐ नमो शिवाय।।
।। दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा।।
ॐ गुरूवे नमः
गुरूब्र्रह्मा गुरू विश्णु गुरूर्देवो महेश्वरः।
गुरूः साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरूवेनमः।।

patko se anurodh

My Computer Book hindi

विशय सूची

  1. कंप्यूटर से परिचय
  2. कंप्यूटर सिस्टम
  3. अपने कंप्यूटर को जाने
  4. इंटरनेट परिचय
  5. डिजिटल भुगतान और प्लेटफार्म
  6. इंटरनेट के अनुप्रयोग
  7. राजस्थान के नागरिको के लिए डिजिटल सेवाएॅ
  8. राजस्थान के नागरिक सेवाओं तक पहॅुच
  9. नागरिक केन्दित सेवाओं की जानकारी
  10. मोबाइल डिवाइस/स्मार्ट फोन के साथ कार्य करना
  11. एम. एस. वर्ड
  12. एम. एस. एक्सेल
  13. एम. एस. पावर पाॅइंट
  14. साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता
  15. आपके कंप्यूटर का प्रबंध
  16. कंम्प्यूटर के अन्य अनुप्रयोग

Part-2

  • महत्त्वपूर्ण प्रश्न
  • आर एस सी आई टी आॅल्ड पेपर्स
  • शोर्ट नोट्स
  • शोर्ट कट कीज एवं फुल फार्म
  • महत्त्वपूर्ण वेबसाईट
  • प्रेक्टिल प्रेक्टिस
  • माॅडल पेपर

patko se anurodh

comming soon

chapter-1

कम्प्यूटर परिचय

कम्प्यूटर -

कम्प्यूटर एक आदेशानुसार स्वचालित इलेक्ट्राॅनिक उपकरण है, जो कि बड़ी-2 गणनाओं, तार्किक समस्याओं एवं वैज्ञानिक अनुबन्धों को कुछ ही क्षणों में हल कर देता है। यह एक ऐसी इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस है जो हमसे इनपुट लेती है और उस पर हमारे आदेशानुसार कार्य करती है और हमारी इच्छानुसार आउटपुट देती है। कम्प्यूटर मुख्यतः दो भागों से बना होता है, हार्डवेयर एवं साॅफ्टवेयर।

कंप्यूटर का वर्गीकरण

1)-आॅपरेटिंग सिद्धांत के आधार पर वर्गीकरण-

एनालाॅग कंप्यूटर- यह मापन के सिद्धांत के पर कार्य करते हैं इनका कार्य किसी भी माप (वाॅल्टेज, तापमान, करंट) को डेटा में बदलता है।
डिजिटल कंप्यूटर- ये कंप्यूटर गिनती/डिजिटल के सिद्धांत पर कार्य करते हैं। यह शुद्धता पूर्ण तेज गति से प्रयोग करने वाले होते हैं। इनका उपयोग सामान्य कार्यो व डेटा पर प्रोसेस करने वाले होते हैं।
हाइब्रिड कंप्यूटर्स- यह डिजिटल व एनालाॅग दोनों ही फाॅर्म में कार्य वाले होते हैं। यह नियंत्रक व लाॅजिकल प्रयोगों के लिए काम में लिए जाते हैं।

2)-आकार/भंडारण क्षमता/प्रदर्शन के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण-

1.सूपर कम्प्यूटर -

यह सबसे शक्तिशाली और महंगे कम्प्यूटर है। ये मशीन उच्च क्षमता व जगह घेरने वाले कम्प्यूटर होते हैं जिनका प्रयोग बड़े संस्थानों में होता है। इनका प्रयोग महत्त्वपूर्ण खोजों व वैज्ञानिक कार्यो के लिए होता है। नासा द्वारा सूपर कंप्यूटर का प्रयोग अंतरीक्ष यान को लांच और नियंत्रित करने व अंतरिक्ष में खोज करने के लिए किया जाता है। पहला सूपर कंप्यूटर 1964 में बनाया गया जिसका नाम सीडीसी 6600 था। आई बी एम का ब्लू जेने विश्व के सबसे तेज कम्प्यूटरों में से एक है। इनका मुख्य कार्य मौसम की भविष्यवाणी, भूकंप की जानकारी लेना, दूरभाष, हथियारों के परीक्षण और परमाणु हथियारों के प्रभाव जानना आदि है। उदा. प्ठडश्े ैमुनवपं (अमेरिका), थ्नरपजेन ज्ञ ब्वउचनजमत (जापान), च्।त्।ड ैनचमत ब्वउचनजमत (भारत)

2.मेनफ्रेम कम्प्यूटर-

इनकी प्रोसेसिंग की गति और डेटा स्टोरेज की क्षमता बहुत अधिक तथा महंगे होते हैं। इनका प्रयोग सरकारी संगठनों, बड़ी व्यावसायिक कंपनियों, विशाल व्यावसायिक बैंको, शिक्षा संस्थानों, इंश्योरेंस कंपनियों आदि में किया जाता है। थ्नरपजेनश्े प्ब्स् टडम्ए भ्पजंबीपशर््े 800

3.मिनी कम्प्यूटर-

इन्हें मिडरेंज कम्प्यूटर भी कहा जाता है और ये रेफ्रिजरेटर के आकार वाले होते हैं। इनका प्रयोग प्रायः छोटे व्यापारों, बडी या मध्यम वर्ग की कंपनीयों, उत्पादन सदनों में प्रयोग किये जाते हैं या सिंगल और मल्टी यूजर कंसेप्ट पर कार्य करते हैं। उदा.- ज्ञ.202ए ज्मगंे प्देजतनउमदज ज्1.990ए ैक्ै.92

4.माइक्रो कम्प्यूटर-

यह सबसे कम शक्तिशाली, सस्ते व सबसे अधिक प्रचलित कम्प्यूटर है। इनका प्रयोग संचार, शिक्षा, मनोरंजन आदि उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है। माइक्रो कम्प्यूटर के चार प्रकार है-
डेस्कटाॅप -
नोटबुक (लैपटाप ) -
टैबलेट पीसी -
हैंडहेल्ड कम्प्यूटर/स्मार्ट फोन- यह कम्प्यूटर सबसे छोटे आकार का होता है जिसे हथेली पर रखा जा सकता है। पर्सनल डिजीटल असिसटेंट (पी.डी.ए.) और स्मार्टफोन सर्वाधिक प्रचलित हैड़हेल्ड कम्प्यूटर है।

कम्प्यूटर की विशेषताएॅ

गति (स्पीड)-

यह लगभग 1 लाख निर्देशों को एक सेकण्ड़ में संसाधित (प्रोसेस) कर देता है।

शुद्धता (एक्यूरेसी) -

कम्प्यूटर में सही डेटा डालने पर सही परिणाम देता है अर्थात यह ळप्ळव्.ळंतइंहम पद हंतइंहम वनज के सिद्धांत पर कार्य करता है।

उच्च संचयन क्षमता (हाई स्टोरेज कैपेसिटी) -


विविधता -

हर प्रकार के कार्य करने में सक्षम

परिश्रमशीलता (डिलिजेंस) -

थकान, एकाग्रता की कमी, बोरियत से मुक्त होता है।

कंप्यूटर की सीमा (लिमिटेशन)

इसमें आई क्यू (प्दजमससपहमदज फनवजपमदज) नहीं होता अर्थात यह अपने दम पर कुछ नहीं कर सकता। निर्देशों के क्रम को बदला नहीं जा सकता है।

साॅफ्टवेयर

कमान्डो या निर्देशों के समूह को साॅफ्टवेयर या प्रोग्राम कहते हैं। साॅफ्टवेयर दो प्रकार के होते हंै एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर एंड़ सिस्टम साॅफ्टवेयर।

1)-सिस्टम साॅफ्टवेयर-

कई प्रोग्रामों का एक समूह, जिसकी मदद से कम्प्यूटर अपने आंतरिक संसाधनों को व्यवस्थित करता है सिस्टम साॅफ्टवेयर या बेकग्राउन्ड़ साॅफ्टवेयर या आॅपरेटिंग सिस्टम के नाम से जाना जाता है। यह हार्डवेयर एवं साॅफ्टवेयर के बीच तथा यूजर्स एवं कंप्यूटर के बीच एक कड़ी या मध्यस्ता का कार्य करता है अथवा एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर को हार्डवेयर से परिचय कराता है। अथवा सिस्टम साॅफ्टवेयर एक ऐसा साॅफ्टवेयर है जो कि यूजर्स से सूचना का आदान-प्रदान कर एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर के कार्य करके आउटपुट देता है। यह कंम्प्यूटर और यूजर के बीच इंटरफेस प्रदान करता है तथा ‘विंडोज’ सबसे अधिक या व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला आॅपरेटिंग सिस्टम है। उदा. विडोंज एक्सपी, विडोंज 95,विडोंज 98, विडोंज विस्टा, विडोंज 7, विडोंज 8, विडोंज 8.1, विडोंज 10, मैकआॅस, यूनिक्स, लाइनक्स, अबन्तु, एम्बेडेड, डिस्ट्रीब्यूटेड, रियल टाईम आदि।
1. आॅपरेटिंग सिस्टम के भाग

यूटिलिटीज- यूटिलिटीज को सर्विस प्रोग्राम के नाम से भी जाना जाता है।
$ बैकअप- आॅपरेटिंग सिस्टम द्वारा आवश्यक फाईलों को सुरक्षित रखना इसका प्रमुख कार्य है।
$ डिस्क क्लिनअप- यह एक ट्रबलशूटिंग यूटिलिटि होती है जो की अनावश्यक फाईलों को डिलिट करके सिस्टम की परफोरमेंस में बढ़ोतरी करती है।
$ डिस्क डिफ्रेग्मेंटर-अंवाछित फ्रेग्मेंटस का पता लगा कर उन्हें डिलिट करना तथा डेटा को सुव्यवस्थित रूप से हार्डडिस्क में जमाने (एक जैसी फाईलो अथवा डेटा को एक साथ) अथवा डिस्क स्पेस को व्यवस्थित करने का कार्य करती है।
डिवाइस ड्राइवर-कम्प्यूटर सिस्टम से जुड़ी सभी डिवाइसों को चलाने में सहायक प्रोग्राम है अथवा डिवाइस ड्राइवर के जरिये ही डिवाइसेज का कम्प्यूटर से संबंध स्थापित होता है।
लैंग्वेज ट्रांसलेटर- असेम्बलर, इंटरप्रेटर, कम्पाइलर
सर्वर- जब विभिन्न यूजर द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रोग्रामों को रन करने की जरूरत पड़ने पर सर्वर का प्रयोग होता है।
2. आॅपरेटिंग सिस्टम के प्रकार
सिगंल यूजर आॅपरेटिंग सिस्टम
सिगंल यूजर मल्टीटास्कीग आॅपरेटिंग सिस्टम
मल्टीयूजर आॅपरेटिंग सिस्टम
मल्टीयूजर एवं मल्टीटास्कींग आॅपरेटिंग सिस्टम
नेटवर्क आॅपरेटिंग सिस्टम
3. इंटरफेस के आधार पर आॅपरेटिंग सिस्टम के प्रकार
कमांड यूजर इंटरफेस (ब्न्प्) - एम. एस. डोस, यूनिक्स, लाइनेक्स आदि
ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (ळन्प्) - विंडोज,
4. आॅपरेटिंग सिस्टम के फंक्शन अथवा कार्य
संसाधनो को मैनेज करना - अधिकतर आॅपरेटिंग सिस्टम डेटा तथा प्रोग्राम्स को फाइलो तथा फोल्डरो के सिस्टम में स्टोर करते हैं। डेटा तथा प्रोग्राम्स को स्टोर करने के लिए फाइले प्रयोग की जाती है। संबंधित फाइले एक फोल्डर के अंदर स्टोर की जाती है, तथा एक फोल्डर में अन्य कई फोल्डर भी हो सकते हैं। यूजर इंटरफेस उपलब्ध कराना - रनिंग ऐप्लीकेशंस - ये प्रोग्राम्स ऐप्लीकेशंस/प्रोग्रोमो को लोड़ अथवा रन करते हैं। मेमोरी प्रबन्धन - डिवाईसेज प्रबन्धन - नोट-कंप्यूटर को स्टार्ट तथा रिस्टार्ट करना बूटिंग कहलाता है। कंप्यूटर को बूट करने के दो तरीके है वार्म बूट तथा कोल्ड बूट। वार्म बूट- जब आॅन कम्प्यूटर को रिस्टार्ट का बटन दबा कर अर्थात कम्प्यूटर को इसकी पाॅवर को टर्न आॅफ किए बिना रिस्टार्ट करते हैं तो इसे वार्म बूट कहते हैं। कोल्ड बूट-उस कंप्यूटर को स्टार्ट करना जो पहले से टर्न आॅफ था कोल्ड बूट कहलाता है।
5. आॅपरेटिंग सिस्टम की विशेशताऐं/फीचर्स-
आइकन- एक प्रोग्राम, फाइल के प्रकार, या फंक्शन के लिए ग्राफिक रिप्रेजेंट करता है।
प्वाइंटर- माउस द्वारा नियंत्रित होता है तथा इसके वर्तमान फंक्शन पर निर्भर करते हुए आकार बदलता है।
विंडोज- सूचना को डिस्प्ले करने तथा प्रोग्राम्स को रन करने के लिए रेक्टेंगुलर एरिया।
मेन्युज- आॅप्शंस या कमांड्स की एक सूची उपलब्ध कराना
डायलाॅग बाॅक्स- सूचना या रिक्वेस्ट इनपुट उपलब्ध कराना
मैसेज बाॅक्स- यूजर्स को सूचना देना
हेल्प एंड सपोर्ट-फंक्शंस तथा प्रोसीजर्स के लिए आॅनलाइन सहायता उपलब्ध कराता है।
टास्कबार-
एसेसरीज-
आॅल प्रोग्राम-
रन-
कंट्रोल पेनल-
डिवाइस एंड प्रिंटर-
6. आॅपरेटिंग सिस्टम की श्रेणियां
एम्बेडिड आॅपरेटिंग सिस्टम- हैंडहेन्ड कंप्यूटरों तथा सबसे छोटी डिवाइसेज जैसे पीडीए तथा कुछ स्मार्ट फोन के लिए प्रयोग किए जाते हैं। संपूर्ण आॅपरेटिंग सिस्टम डिवाइस में स्टोर या एम्बेड किया जाता है। लोकप्रिय एम्बेडिड आॅपरेटिंग सिस्टम विंडोज सीई तथा विंडोज एक्सपी एम्बेडिड है।
नेटवर्क आॅपरेटिंग सिस्टम (एन.ओ.एस)-उन कंप्यूटरो को कंट्रोल तथा कोओर्डिनेट करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं जो एक साथ नेटवर्कड या लिंक्ड या जुडे हुए होते हैं। लोकप्रिय नेटवर्क आॅपरेटिंग - नेटवेयर, विंडोज एनटी सर्वर, विंडोज एक्सपी सर्वर, तथा यूनिक्स।
स्टैंड- अलोन आॅपरेटिंग सिस्टम या डेस्कटाॅप आॅपरेटिंग सिस्टम - विंडोज, मैक ओएस, तथा यूनिक्स तथा लाइनक्स के अन्य वर्जन
विंडोज- माइक्रोसाॅफ्ट की विंडोज अब तक के सबसे लोकप्रिय माइक्रो कंप्यूटर आॅपरेटिंग सिस्टम है। उदा. विंडोज एक्स पी, विंडोज-विस्टा, विंडोज-7, विंडोज-8, विंडोज 8.1 विंडोज 10 आदि
मैक ओएस-एप्पल ने 1984 में इसका मैकिनटोश माइक्रो कम्प्यूटर तथा आॅपरेटिंग सिस्टम पेश किया। मैकिनटोश आॅपरेटिंग सिस्टम के नए वर्जनों में से एक है मैक ओएस एक्स, मैक ओएस का एक वर्जन, लिओपार्ड है, जो बूट कैम्प को भी शामिल करता है।
यूनिक्स व लाइनक्स- यूनिक्स आॅपरेटिंग सिस्टम मूल रूप से नेटवर्क एनवायरमेंट्स में मिनिकम्प्यूटरों पर चलाने के लिए डिजाइन किए जाते हंै। यूनिक्स के अनेक भिन्न वर्जन है, जिस पर आज अत्यधिक ध्यान दिया जा रहा है, वह लाइनक्स है।

2)- एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर-

1. बेसिक एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर-
ऐसे साॅफ्टवेयर जो कि आवश्यक या निजी या आॅफिस से सम्बंधित सभी कार्यो को करने में सक्षम होते हैं, उन्हें एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर या एंड यूजर साॅफ्टवेयर कहते हैं। इनका उपयोग आजकल व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा विज्ञान, बैंकिग, इंडस्ट्रीज में किया जाता है।
वर्ड प्रोसेसर- एम एस वर्ड इसका प्रयोग सभी प्रकार के एप्लीकेशन, पत्र, फेक्स, व्यक्तिगत या अव्यक्तिगत मैमो आदि बनाने के लिए किया जाता है। एम एस वर्ड की तरह अन्य वर्ड प्रोसेसर के उदा.-पेजमेकर, क्वार्क एक्सप्रैस, एडोब इनडिजाइन आदि।
स्पे्रडशीट साॅफ्टवेयर- एम एस एक्सेल को स्पे्रडशीट साॅफ्टवेयर भी कहते हैं, स्प्रेडशीट का प्रयोग सभी प्रकार की गणनाओं विशलेशणों, ग्राफों, बजट, वित्त आदि बनाने में किया जाता है।
प्रजेटेंशन साॅफ्टवेयर- एम एस पाॅवर पांइट एक प्रजेटेंशन साॅफ्टवेयर है इससे किसी भी प्रोजेक्ट, प्रोग्राम आदि की श्रेणी बद्ध चलचित्रात्मक रूप में स्लाइड बनाई जाती है।
डेस्कटाॅप पब्लिकेशन साॅफ्टवेयर-पेजमेकर, कोरेल ड्रा,फाॅटोशाॅप
डेटाबेस मेनेजमेंट साॅफ्टवेयर- एम एस एक्सेस
इमेज एडीटर-
वेब ब्राजजर-गुगल क्रोम, नेटस्केप नेविगेटर, यू सी ब्राउजर, माॅजिला फायरफाॅक्स, इंटरनेट एक्सप्लोरर, आॅपेरा मेनू, माइक्रो साॅफ्ट एज, यूसी ब्राउजर आदि।
अन्य एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर- एम एस आउटलुक, कोरल प्रेजेन्टेशन, लोट्स फ्रीलांस ग्राफिक, नोटपेड, वर्डपेड, पेंट आदि
2. स्पेशलाइज्ड एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर-
निजी कंपनीयों या विशेश कार्यो के लिए बनाएं गये साॅफ्टवेयर

हार्डवेयर

कम्प्यूटर सिस्टम के वह भौतिक भाग या पार्ट जिन्हें हम देख व छु सकते हैं। जैसे-कंम्प्यूटर केस, माॅनीटर, की-बोर्ड, माउस, प्रिंटर, मदरबोर्ड, मेमोरी चिप्स, इलेक्ट्राॅनिक सर्किट, एक्सटेंशन कार्ड केबल, स्विच आदि। कम्प्यूटर हार्डवेयर को मुुुख्यतः निम्न भागों में बाॅटा जाता है-सिस्टम यूनिट (प्रोसेसिंग) , इनपुट, आउटपुट, स्टोरेज डिवाइसेज

1)-सिस्टम यूनिट (प्रोसेसिंग यूनिट)-

सिस्टम यूनिट एक कंटेनर या चैसिस होता है जिसे सामान्यतया केबिनेट के नाम से जानते हंै, जिसमें कम्प्यूटर के महत्त्वपूर्ण घटक अथवा इलेक्ट्राॅनिक उपकरण (मदरबोर्ड, प्रोसेसर, रैम, हार्डडिस्क, डीवीडी राईटर अथवा ड्राइव व एस. एम. पी. एस.) लगे होते हैं।
1. मदरबोर्ड-
मदरबोर्ड को सिस्टम बोर्ड़ भी कहते हैं यह एक विशाल सर्किट बोर्ड है या यह कम्प्यूटर की एक मुख्य प्लेट है जिसमें साॅकेट, स्लाॅट, संयोजन लाईन या बस लाईने होती है जिनके द्वारा माइक्रोप्रोसेसर, रेम तथा विभिन्न प्रकार के कार्ड कनेक्ट किये जाते हैं।
2. माइक्रोप्रोसेसर-
सी पी यू का पूरा नाम सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है इसे कम्प्यूटर का दिमाग भी कहते हैं। इसके मुुुुख्यतः दो भाग कंट्रोल यूनिट तथा अर्थमेटिक एवं लाॅजिकल यूनिट है।
3. मेमोरी-
कैश मेमोरी, प्राइमरी मेमोरी, सेकण्ड़री मेमारी

2)-इनपुट-

ट्रेकबाॅल, टच पैड, माइक्रोफोन, की-बोर्ड, सेंसर, माउस, ज्याॅस्टिक, स्केनर, वेब केमरा

3)-आउटपुट-

माॅनिटर, प्रिंटर, हैडफोन, स्पीकर, टचस्क्रीन, प्रोजेक्टर

4)-स्टोरेज-

हार्ड डिस्क ड्राइव

कंप्यूटर के उपयोग

कंप्यूटर से हमारा जीवन आसान, सरल कुशल और उत्पादक हो गया है। कंप्यूटर का उपयोग आजकल सभी क्षेत्रों में जैसे शिक्षा, चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशासन, परिवहन, रेलवे, संचार , व्यापार, मनोरंजन, घर, अस्पतालों आदि में किया जाता है।
1. घरों में कंप्यूटर का उपयोग
स्कूली बच्चों के लिए होमवर्क - मनोरंजन - फिल्मों, वीडियो देखने, संगीत सुनने, गेम, लाइव स्ट्रीमिंग वीडियों आदि।
सामाजिक मीडिया - फेसबुक, इंस्टाग्राम, गूगल प्लस द्वारा वीडियों चेट करने आदि।
ज्ञान - इंटरनेट पर उपलब्ध वेबसाइटें, किताबें, ट्यूटोरियल और प्रासंगिक शैक्षिक और सूचनात्मक सामग्री पढ़ने और डाउनलोड़ करने आदि।
2. शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर का प्रयोग
स्मार्ट क्लास - इंटरेक्टिव मीडिया, चित्र, वीडियो, एनिमेशन, प्रस्तुतियों, सिमुलेटेड कंटेंट, स्मार्ट सामग्री, अवधारणाऐं (काॅन्सेप्ट्स) समझाने, लंबे समय के लिए ज्ञान बरकरार रखने, अतिरिक्त ई आर पी, शिक्षकों और छात्रों के प्रदर्शन को ट्रेक कर स्वचालित स्कोर कार्ड पैदा करना, प्रशासन की गतिविधियाॅ, प्रदर्शन का विश्लेषण आदि।
आॅन लाईन शिक्षा - आॅनलाईन ही काॅलेज या यूनिवर्सिटी को सर्च कर आॅन लाईन एडमिशन व आॅन लाईन (घर बैठे) प्रशिक्षण प्राप्त कर आॅन लाईन ही डीग्री प्राप्त कर लेना आजकल इसकी बढ़ोतरी हो रही है।
डिजिटल लाइब्रेरी- आजकल सभी प्रकार की किताबे सॅाफ्ट काॅपी (ई-बुक) के रूप में परिवर्तित कि जा रही है जिन्हें स्टूडेंट इंटरनेट या मोबाइल के माध्यम से कही पर भी पढ़ सकते हैं।
अनुसंधान/ परियोजनाएं - सभी प्रकार के कटेंट, डेटा और नाॅलेज आजकल पर्याप्त मात्रा में आॅन लाइन उपलब्ध है जो की अनुसंधान के लिए पर्याप्त है।
3. कंप्यूटर का व्यवसाय में उपयोग

व्यापार की लागत कम करने और ग्राहकों की संतुंिष्ट बढाने के लिए मुख्य रूप से होता है।

संचार - ई-मेल, त्वरित संदेश, संपर्क प्रणाली, वीओआईपी, वीडियो चेट द्वारा संचार


बिक्री एवं विपणन - विज्ञापन बनाने व देने व उपभोक्ता से सम्पर्क बिक्री करना। डिजिटल विपणन (मार्केटिंग) या इन्र्रूवतक में मोबाइल, टीवी, रेडियो, इंटरनेट वेबसाइट आदि के द्वारा प्रोडक्ट्स के टारगेट, मेसरेबल, एवं इंटरैक्टिव मार्केटिंग के द्वारा उपभोक्ता तक पहुॅचना उन्हें बेचना संतुष्ट करना और बरकरार रखना है


संबद्ध विपणन -
प्रदर्शन विज्ञापन -
ई-मेल विपणन -
खोज विपणन -
सोशल मीडिया -
खेल द्वारा विज्ञापन -
वीडीयो विज्ञापन -

मानव संसाधन -कंपनियों द्वारा स्वचालित वित्त और मानव संसाधन कार्यो को संभालने के लिए ई आर पी का उपयोग करते हैं। इन ई आर पी मंें वित्तीय लेखाकंन, खाता बही से संबधित सभी कार्य अथवा लेखांकन व मानव मूल्यांकन आदि सम्मिलित है। ;म्त्च्.म्दजमतचतपेम त्मेवनतेम च्संददपदह च्ंबांहमद्ध


शिक्षा और प्रशिक्षण - कर्मचारियों को शिक्षित करने, कंपनी की नीतियों, व्यवसायिक विषयों की चर्चा, मानक प्रक्रियाओं, आॅनलाइन आंकलन आदि के लिए ई-लर्निंग प्लेटफार्म का कार्य करता है।


अध्याय 2.

कम्प्यूटर सिस्टम

कंम्प्यूटर सिस्टम में मुख्यतः इनपुट डिवासेज, आउटपुट डिवासेज, इनपुट/ आउटपुट डिवाईसेज एवं मेमोरी से मिलकर बना होता है

इनपुट डिवाइसेज

कम्प्यूटर को डेटा प्रदान करने वाली डिवाइस इनपुट डिवाइस कहलाती है। उदा.-माउस, की-बोर्ड, जॉयस्टिक, माइक, लाइट पेन, स्केनर आदि।

1)- की-बोर्ड -

कीबोर्ड कीज अथवा बटन क्वर्टी QWERTY रूप में व्यवस्थित होते हैं। popil-sir
की-बोर्ड के प्रकार-पारम्परिक, लचीले, एर्गोनोमिक , वायरलेस, पीडीए आदि।
कीज के प्रकार -
न्यूमेरीक कीज या डीजिटल कीज - 0 से 9
+ नेविगेशन कीज या कर्जर कंट्रोल कीज -
+ फंक्शन कीज - F1 से F12 तक
+ स्पेशल करैक्टर कीज या सिम्बल कीज-
+ एल्फाबेटिकल कीज या टाईप राइटर कीज - A र्से Z तक
+ टॉगल कीज-केप्स लोक, स्क्रोल लोक, नम लोक
+ कोम्बिनेशन कीज या कंट्रोल कीज - कंट्रोल, आल्ट, शिफ्ट आदि
+ एडिंटिंग कीज - होम, इंसर्ट, पेज अप, पेज डाउन, एंड

2)- पॉईटिग डिवाइस-

इनका उपयोग ग्राफिकल यूजर इंटरफेस में स्क्रीन पर माउस की स्थिति बताने के लिए किया जाता है।
1. माउस- मोनिटर पर दिखने वाले पॉईटर को नियंत्रित करने के लिए माउस का प्रयोग करते हैं। यह एक तीर के चिन्ह के समान होता है। माउस सामान्यतया निम्न प्रकार के होते है- ऑप्टिकल माउस, मैकेनिकल माउस, वायरलेस या बेतार माउस। माउस मै मुख्यतः तीन बटन होते हैं-लेफ्ट बटन/ लेफ्ट क्लिक (सलेक्ट करने के लिए), राईट बटन/राईट क्लिक (शोर्टकट मेन्यू खोलने के लिए), स्क्रोल (कम-अधिक या ऊपर-नीचे करने के लिए)। पूराने माउसों में कर्जर को मूव करने के लिए माउस के नीचे एक बॉल का प्रयोग किया जाता था जबकि आज बोल की जगह प्रकाशीय सेंसर का उपयोग किया जाता है। आजकल बेतार/वायरलेस माउस का अत्यधिक प्रयोग होता है।
नोट- 1.ट्रेकबॉल, टचपैड और पोइंटिंग स्टिक भी माउस के समान ही उपकरण होते हैं।
2.बेतार माऊस में रेडियो या इंफ्रारेड प्रकाश तरंगों का प्रयोग किया जाता है।
2. टच पेड- अधिकतर लेपटॉप में टच-पैड का प्रयोग किया जाता है टच पैड की सतह पर अंगुली घुमाकर/फिराकर/फिसलाकर स्क्रीन पर कर्जर को मूव करते हैं तथा पैड के नीचे ही लेफ्ट व राईट बटन होते हैं।
3.ट्रेक पाइंट- आई बी एम के थिंक पैड में प्रायः टचपैड न होकर ट्रैकपॉइंट होता है जो एक छोटी रबर प्रोजेक्शन की-बोर्ड की कीज के बीच एम्बेडेड होता है। ट्रैकपाइंट एक छोटे जॉययस्टिक की तरह कार्य करता हुआ कर्सर को नियंत्रित करता है।
4. ट्रेक बॉल- ट्रैक बॉलमाउस की तरह का उपकरण है जिसमें बॉलशीर्ष/ऊपर/टॉप में होती है। ट्रैकबॉल डेस्क पर स्थित होती तथा बॉलको अंगुली से घुमाते हैं। आजकल के ट्रेक बॉल में रोलर्स की जरूरत नहीं होती है।
5. जॉययस्टीक- जॉयस्टिक का उपयोग गेम खेलने के लिए किया जाता है।
6. लाइट पेन- यह प्रकाश संवेदी कलम (पेन) जैसा उपकरण होता है, तस्वीरों व रेखाचित्रों की एडीटिंग के लिए प्रयोग किया जाता है।
7. स्टायलस- पीडीए, टच स्क्रीन मोबाइलों, टेबलेट आदि के साथ प्रयोग होता है।

3) - ग्राफिक टेबलेट-

ग्राफिक्स टैबलेट में एक इलेक्ट्रोनिक लेखन क्षेत्र होता है जिसमें स्पेशल पेन के यूज के द्वारा आर्टिस्ट ग्राफिकल इमेजेज बना सकते है जैसे सामान्यतया ड्राइंग से डिवाइस से बनाते हैं यह पेन के दबाव के प्रति संवेदनशील होता है, दबाव बढ़ाने पर ब्रश की साइज भी बढ़ती है।

4) - स्कैनिंग उपकरण-

प्रिंटेड पेज/ग्राफिक इमेज के डिजिटलीकरण/ छोटे-छोटे पिक्सल में बदलने/कंप्यूटर में डालने के लिए किया जाता है। अथवा इसमें लेजर तकनीक का प्रयोग कर किसी टेक्स्ट, इमेज, चित्र, प्रिंटेड पेज आदि को कंम्प्यूटर में फीड करने के लिए किया जाता है। स्कैनिंग उपकरण निम्न चार प्रकार के होते हैं।
1. ऑप्टिकल स्कैनर - इन्हें स्केनर भी कहते है यह जेरोक्स मशीन की तरह होते है तथा इनके द्वारा किन्हीं भी तस्वीरों व लिखित डेटा को कम्प्यूटर में फीड करने के लिए किया जाता है। यह निम्न प्रकार के होते हैं-
$ पोर्टेबल स्केनर-
$ फ्लेटबैड स्केनर-
2. इमेज कैप्चरिंग उपकरण - डिजिटल कैमरे, वेब कैमरे आदि

5)- मिडी डिवाइस -


6)- कैरेक्टर व चिन्ह पहचानने वाले उपकरण -


मैग्नेटिक इंक करैक्टर रिकग्निशन (एम आई सी आर) - इन डिवाइसो को करैक्टर पहचानने के लिए प्रयोग किया जाता है। जैसे चेक अथवा अन्य दस्तावेजों आदि।
ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओ एम आर) - इसका प्रयोग पेंसिल अथवा पेन द्वारा बनाये गये गोलां/ निशानों को पहचानने के लिए किया जाता है। उदा.-ओ एम आर उत्तर पुस्तिकाएं आदि।
ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशिन (ओ सी आर) - इनका प्रयोग ऑटोमेटेड डाटा एंट्री के लिए प्रयोग होता है जैसे ओ सी आर यूज करके प्रिंटेड पेपर, डाटा रिकार्डस, पासपोर्ट दस्तावेज, बैंक चालान, बैंक स्टेटमेंट, कंप्यूटरीकृत रसीदें, बिजनेस कार्ड मेल आदि को स्कैन करके डिजिटल फॉर्ममे परिवर्तित करते हैं।
बार कोड रीडर-समांतर लाइनों के बीच की दूरी एवं उनकी चैड़ाई में अंतर करके उन्हें अंको में बदलना, आयत, डॉट्स, षट्कोण और अन्य ज्यामितीय आकारों को पहचानने का कार्य करता है। इनका उपयोग बिलिंग व इन्वेंटरी मैनेजमेंट के लिए किया जाता है। अथवा यह हैडहेल्ड नुमा डिवाइस है जो की बार कोड पढ़ने व आइटमों को पहचानने के लिए प्रयुक्त होती है।

7)-स्पीच रिकग्निशन डिवाइस-


8)-वेब केम-


आउटपुट डिवासेज

1)- मोनिटर -

मोनिटर पर नजर आने वाले आउटपुट को सॉफ्टकोप़ी कहते हैं। मोनिटर पर तस्वीरे बिंदुओ या पिक्सेल से मिलकर बनती है। तस्वीर के अपडेट होने या रिफ्रेश होने को रिफ्रेश रेट कहते हंै। सामान्यतः मोनिटर 15,17,19, 20, 21, 24 इंच के होते हैं। मोनिटरो के लिए सामान्यतः ऐस्पैक्ट रेशियो 4:3, 16:10 होता है।
मोनिटर स्क्रीन का आकार विकर्ण के रूप में इंच में मापा जाता है। तथा रिज्योल्यूशन को पिक्सल में मापा जाता है, एक मोनिटर पूरी स्क्रीन पर कितने पिक्सेल डिस्प्ले करता है यह उसका रिज्योल्यूशन शन होता है उदा.-800*600ए 1024*768 आदि। जिन डॉट मिलकर पिक्चर बनती है उन्हें पिक्सेल कहते हैं। स्क्रीन पर डॉट के बीच की दूरी को पिच कहते हैं। पिच जितने छोटे होते है अथवा डॉट जितनी अधिक या पास-पास होती है तस्वीर उतनी बढ़िया होती है।
1. सी आर टी (कैथेड रे ट्यूब्स) मोनिटर - यह अधिक जगह घेरने वाले सी आर टी मोनिटर है जो कि टी वी के समान होते है। इसमें एक कैथोड़ रे ट्यूब होती है जो अलग-2 पावर की इलेक्ट्रोन बीम का प्रयोग करके स्क्रीन पर पिक्चर बनाते हैं।
2. फ्लेट पैनल मोनिटर -
एल सी डी (लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले)- एल सी डी कई पतली परतों से मिलकर बनती है जब प्रकाश इन परतों से गुजरता है तो ये प्रकाश का ध्रुवीकरण करता है एक परत का ध्रवीकरण जिसमें की लम्बे पतले अणु हाते हैं जिसको क्रिस्टल डिस्प्ले कहा जाता है।
एल ई डी (लाईट इमेटिंग डायोड)- प्लाज्मा डिस्प्ले का अधिकतर प्रयोग लेपटॉप में होता है।
3. अन्य मोनिटर - डेटा प्रोजक्टर, हाई डेफिनिशन टेलीविजन (एच. डी. टी. वी.)

2)- प्रिटंर-

लिखित डेटा, फोटोग्राफ, वेब पेजों आदि को प्रिंट करने के लिए प्रिंटर का प्रयोग किया जाता है, प्रिंटर से प्राप्त आउटपुट को हार्डकाॅपी कहते हैं। प्रिंटर के रिजोल्यूशन को डॉट प्रति इंच में मापा जाता है। प्रिंटर के प्रकार-
1. इम्पेक्ट प्रिंटर -
करेक्टर प्रिंटर- डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर में अनेक छोटी-छोटी सक्रिय पिनों द्वारा कागज पर चोट मारकर करैक्टर व तस्वीरों को बनाया जाता है, इनमें ब्लेक इंक के रिबन का प्रयोग होता है यह कम मंहगे तथा चिड़चिड़ाहट की आवाज (शोर) करने वाले तथा कम विश्वसनीय (धीमें) होते है, ड्रम प्रिंटर, चेन प्रिंटर, डेजी व्हील प्रिंटर, लाईन प्रिंटर भी अन्य प्रिंटरों की श्रेणी में आते हैं। इनका प्रयोग बड़े-बड़े व्यवसायों में होता है तथा मुख्यत यह 80 या 132 कोलम में प्रयुक्त होते हैं।
लाईन प्रिंटर- यह प्रिंटर एक बार में एक लाइन प्रिंट करते हैं। इन प्रिंटरों में एक जिसमें बहुत सारी पिनों के विद्युत यांत्रिकी हेड़ द्वारा रिबन जो की पेपर के ऊपर होता है उस पर चोट मार कर अक्षरों को प्रिंट किया जाता है इसमें 200 से 2000 लाईन प्रति मिनट प्रिंट की जा सकती है। 2. नॅान इम्पेक्ट प्रिंटर- यह प्रिंटर बिना किसी आवाज के तेज गति से प्रिंट करते हैं।
इंकजेट प्रिंटर - इंकजेट में तरल स्याही का प्रयोग होता है यह तरल स्याही कारटेज में भरी होती है, उच्च गति से कागज पर कारटेज द्वारा स्प्रे (छिड़काव) कर छपाई की जाती है।
लेजर प्रिंटर - लेजर प्रिंटर में स्याही पाउड़र के रूप में प्रयोग होती है तथा लेजर प्रिंटर में टोनर का प्रयोग होता है, इसमें भी छपाई के लिए फोटो कोप़ी मशीन की तरह लेजर प्रकाश बीम का प्रयोग किया जाता है। इस प्रिंटर में फोटो सेंसेटिव सामग्री के साथ लेपित ड्रम को चार्ज किया जाता है उसके बाद एक लेजर या एलईडी द्वारा ड्रम पर इमेज का निर्माण किया जाता है फिर ड्रम टोनर के थ्रू (द्वारा) घूमता है और कागज पर जमा हो जाता है और हीट के कारण कागज से जुड (फ्यूज) जाता है। यह कलर और ब्लेक (मोनो क्रोम) दोनों प्रकार के होते हैं तथा इनकी गति पेजेज प्रति मिनट में होती अर्थात यह प्रिंटर बहुत तेज होते हैं।
थर्मल प्रिंटर-ऊष्मा संवेदी कागज पर इमेज बनाने के लिए ही है एलिमेंटों का उपयोग करते है। कलर थर्मल प्रिंट जिन्हें डाइ-सब्लिमेशन प्रिंटर के रूप में जाना जाता है। हीट संवेदनशील कागज पर गर्म तत्वों का उपयोग कर प्रिंट करने के लिए उपयोग किये जाते हैं जैसे एटीएम कार्ड, लाइसेंस आदि।
प्लोटर - यह ड्रम प्लोटर और फ्लैट बेड प्लोटर प्रकार के होते है तथा इंक पेस या इंकजेट की मदद से प्रिंट करते है तथा उच्च गुणवत्ता वाली कलाकृतियों, बिल्डिंग प्लान, सर्किट डाइग्राम आदि प्रिंट करने के लिए यूज किये जाते हैं आजकल इनका प्रयोग फ्लेक्स प्रिंटीग में बहुतायात से हो रहा है।

4)- ऑडियो-आउटपुट उपकरण-

स्पीकर, हैडफोन

5)-मल्टीमीडीया प्रोजेक्टर-

लेपटॉप अथवा डेस्कटॉप के द्वारा कनेक्ट कर पर्दे अथवा दिवार पर आउटपुट प्रदर्शित करने का कार्य किया जाता है। इनका उपयोग मीटिंग्स व कांफ्रेस के लिए किया जाता है।

इनपुट/आउटपुट डिवाइसेज

इन्हे कोम्बिनेशन या संयोजन डिवाइसेज भी कहते हैं। इनमें आउटपुट व इनपुट दोनों प्रकार के कार्य करने की क्षमता होती है।
फैक्स मशीने- किसी भी डाक्यूमेंट को शून्य और एक में परिवर्तित कर किसी भी जगह भेज/प्राप्त कर प्रिंट कर सकता है।
मल्टी फंक्शनल उपकरण- एक से अधिक कार्य करने में सक्षम होती है जैसे प्रिंट, स्केन, कोप़ी (जेरोक्स) आदि।
मॅाडेम -यह टेलीफोन लाईन से प्राप्त एनालॉग सिग्नल को डिजिटल में व कंप्यूटर से प्राप्त डिजिटल सिग्नल को एनालॉग में परिवर्तित करता है।

कंम्प्यूटर मेमोरी

एक ऐसा पात्र जिसमें डाटा व इन्फोर्मेशन स्टोर होती है उसे मेमोरी कहते हैं, कंप्यूटर मेमोरी भी मानव मेमोरी के समान होती है। मैमोरी चिप मुख्यतः तीन प्रकार की होती है-कैश मेमोरी, प्राईमरी मेमोरी, सेकण्डरी मेमोरी

1)-कैश मेमोरी -

यह मेमोरी बहुत ही उच्च गति अर्द्धकंडेक्टर मेमोरी है जो सीपीयू की गति को बढ़ाती है यह डेटा या प्रोग्राम के उन भागों को रखती है जिन्हें प्रासेसर को काम में लेना होता है या जिन्हें सीपीयू द्वारा बार-बार इस्तेमाल करना है।
लाभ-यह मुख्य मेमोरी से तेज व कम समय का उपयोग करती है, तथा छोटी अवधि के लिए संग्रहित करने वाले प्रोग्रामों/डेटा को स्टोर करती है
सीमाएं-संग्रहण क्षमता सीमित व बहुत महंगी होती है।

2)-प्राईमरी मेमोरी -

यह उन डेटा/निर्देशों को संग्रहण करती है जिन पर वर्तमान समय में कंप्यूटर कार्य कर रहा हो तथा यह मेमोरी बिजली जाने पर डेटा/निर्देशो को खो देती है। मुख्य मेमोरी दो प्रकार की होती है।
1.रेण्डम एक्सेस मेमोरी -
यह मेमोरी अस्थाई या वोलोटाइल या नाशवान प्रकार की मेमोरी है। जो रीड एवं राईट दोनों प्रकार के कार्य करती है। रेम में किसी स्थान पर मौजूद डाटा पर पहुचा जा सकता है। इसलिए इसे रेण्डम ऐक्सस मेमोरी भी कहते है यह मेमोरी बहुत सारे ट्रांजिस्टर से मिलकर बनती है। रेम दो प्रकार की होती है
Dynamic RAM(DRAM) -यह समय समय पर रिफ्रेश होती रहती है। यह SRAM से महंगी तथा तेज होती है।
Static RAM(SRNM) यह सीपीयू के लिए प्रयोग होती है। रेम के अन्य प्रकार निम्न है-
$ एक्सटेंडेड डेटा आउटपुट (EDO) इस मेमोरी में किसी भी स्थान तक पहुच सकते हैं। यह इनफोर्मेशन 256 बाइट्स में स्टोर कर करती है।
$ SDRAM(Synchronous DRAM)ये रेम चिप्स उसी क्लोक रेट का उपयोग करती है जो सीपीयू यूज करती है।
$ DDR-SDRAM(DoubleDate Rate SRAM) यह रेम डेटा का स्थानांतरण घड़ी के दोनों किनारों पर करती है।
2.रीड ओनली मेमोरी (ROM) -
यह नॉन-वोलेटाइल/ स्थाई मेमोरी है यह बिजली पर निर्भर नहीं होती है इसमें उपस्थित डेटा को बदला/परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।
PROM(Programmable Read only memory
popil-sir - इस प्रकार की मेमोरी में यूवी किरणो (अल्ट्रा वायलेट ) द्वारा समस्त डेटा को एक साथ मिटाना संभव है, यह सस्ती व विश्वसनीय मेमोरी है।
Flash Memory - यह मेमोरी ट्रांजिस्टर के रूप में होती है इसमें उपस्थित डेटा को विद्युतीय उपकरणों द्वारा मिटाया जा सकता है, कम बिजली खपत, अधिक विश्वसनीय, बहुत सस्ती होती है इसका प्रयोग कैमरा, एम पी 3 प्लेयर आदि में किया जाता है।

3)-सेकण्डरी मेमोरी या सेकण्डरी स्टोरेज -

यह नॉन वोलेटाईल/स्थाई प्रकार की मेमोरी है इसका संबध सीधे सीपीयू से नहीं होता बल्कि इनपुट व आउटपुट द्वारा निर्देशित होने पर पहले इसका डेटा मुख्य मेमोरी में स्थानांतरीत होता है फिर सीपीयू द्वारा प्रोसस होता है यह मेमोरी ऑप्टिकल और मेग्नेटिक प्रकार की कम कीमत अधिक विश्वसनीय तथा बेकअप के रूप में अधिक (भारी भरकम) डेटा को संग्रहित करने वाली डिस्क है। सेकेण्डरी स्टोरेज डिवाइस में सूचना सेव करने को राइटिंग कहते हैं। सेकेण्डरी स्टोरेज से सूचना प्राप्त करने को रीडिंग कहते हैं।
सेकण्डरी मैमोरी की विशेषताएं-ये ऑप्टिकल व मेग्नेटिक दो रूपो में होती है तथा बैकअप के काम आती है तथा बिजली बंद होने के बाद भी इसमें डेटा स्थायी रूप से संग्रहित रहता है इसमें धीमी तथा भारी भरकम डेटा को कम लागत में स्टोर किया जा सकता है
1. हार्डडिस्क - हार्डडिस्क में कठोर धातु के चुंबकिय सामग्री से लेपीत प्लैटर्स/डिस्क का उपयोग होता है। हार्ड डिस्क में विभिन्न ट्रैक, सेक्टर तथा सिलिंडर के इस्तेमाल द्वारा फाइल्स स्टोर तथा व्यवस्थित होती है। ट्रैक दिखाई न देने वाली नलिकाओं से रहित कंसेन्ट्रिक सर्किल्स होते हैं। प्रत्येक ट्रैक वेज-आकृति में नजर आने वाले खण्ड़ो में बंटे होते हैं, जो सेक्टर कहलाते हैं। रीड/राइट हेड हार्ड डिस्क के तल से अथवा इसके तल पर स्थित किसी कण से टकराता है तो उसे हेडक्रैश कहते है हार्ड डिस्क मूलतः दो प्रकार की होती है-आंतरिक तथा बाह्य।
आंतरिक हार्ड डिस्क-आंतरिक हार्ड डिस्क सिस्टम यूनिट के भीतर मौजूद होती है। ज्यादातर माइक्रो कंप्यूटर सिस्टम के लिए, आंतरिक हार्ड डिस्क ड्राइव को ‘सी’ ड्राइव का नाम दिया जाता है।
बाह्य हार्ड ड्राइव- बाह्य हार्ड डिस्क को यू एस बी पोर्ट में लगा कर एक्सेज किया जाता है इसे यूएसबी हार्ड डिस्क भी कहते हैं। हार्ड डिस्क की कार्य-क्षमता बढ़ाने के तीन उपाय है-डिस्क कैशिंग, सस्ती डिस्क के फालतू विन्यास तथा फाइल कम्प्रेशन/ डिकम्प्रेशन।
डिस्क कैशिंग-
रिडन्डैंट ऐरेंज ऑफ़ इनएक्सपेंसिव डिस्क (RAID) -
फाइल कम्प्रेशन तथा डिकम्प्रेशन- डेटा तथा प्रोग्राम्स को स्टोर करने के लिए आवश्यक स्थान की मात्रा को घटाकर स्टोरेज क्षमता को बढ़ाना है। उदा.- विनरार, पी के जिप, विन जिप आदि
2. ऑप्टिकल डिस्क - इनका आकार वृत्ताकर थाली के समान होता है। यह निम्न प्रकार की होती है
वार्म (राईट वंस रीड मोर) डिस्क/ सीडी रिकोर्डेबल डिस्क - इसमें एक ही बार डेटा स्टोर या राईट किया जा सकता है इस डिस्क डेटा को पढ़ने के लिए लेजर बीम तथा डिस्क की सतह पर गड्ढे (पिट्स) बना कर लिखा/राईट किया जाता है।
कोम्पैक्ट डिस्क-रीड/राईट - इसमें डिस्क पर कितनी ही बार राईट कर सकते हैं। सीडी के नाम से प्रसिद्ध कोम्पैक्ट डिस्क सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला ऑप्टिकल फ़ोर्मेट है। सीडी ड्राइव सीडी के एक ओर 650 एमबी (मेगाबाइट) से 1 जीबी (गीगाबाइट) तक डेटा स्टोर कर सकता है।
डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क या डिजिटल विडियो डिस्क - यह सी डी जैसी होती है परन्तु इसकी भण्डारण क्षमता 4.7 से 8.7 जीबी तक होती है यह एकल अथवा डबल परतो वाली होती है इनका अधिकतर प्रयोग फिल्मो व ऑडियो फाइलो के लिए होता है
हाई-डेफिनिशन डिस्क या ब्लू-रे डिस्क - इनकी क्षमता 50 से 500 जीबी तक होती है।
3. पेन ड्राइव/फ्लैश मेमोरी - यह यूएसबी पोर्ट के माध्यम से कनेक्ट किये जाते हैं जो छोटे तथा सस्ते होते हैं कहीं भी लाने व ले जाने में सुविधा होती है। इनको चाबी के छल्ले के साथ लगाया जा सकता है।
4. स्मार्ट मीडिया कार्ड-यह पोर्टेबल क्रेडिट कार्ड जैसे हाते हैं जो केमरे में प्रयुक्त होते हैं।
5. सिक्योर डिजिटल कार्ड (एस डी कार्ड) - इनमें डेटा को लोक और रक्षा करने की क्षमता होती है। यह निम्न प्रकार के होते है।
मिनी एस डी कार्ड- स्मार्ट फोन व मोबाइल आदि में प्रयोग होते हैं।
माइक्रो एस डी कार्ड-यह मेमोरी कार्ड से भी छोटे होते है।

अध्याय 3.

अपने कम्प्यूटर को जाने

ऑपरेटिंग सिस्टम

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सॉफ्टवेयरहै जो कम्प्यूटर को कार्य करने योग्य बनाता है। यह हमारे द्वारा प्रयोग में लिये जाने वाले सभी प्रोग्रामों को चलाने में सहयोग करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर को कंट्रोल करता है। बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कोई भी कम्प्यूटींग डिवाइस काम नहीं कर सकती है। अतः ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर, मोबाइल डिवाइस और गेम और सूपर कम्प्यूटर इत्यादि सभी के लिए आवश्यक अंग है। माइक्रोसॉफ्ट विण्डो, मेक ओएस, लाइनेक्स, यूनिक्स इत्यादि और मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण एन्ड्राइड, विण्डो, ios. symbian इत्यादि है।

1.कंप्यूटर सिस्टम संरचना की लेयर -

हार्डवेयर, सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

2. ऑपरेटिंग सिस्टम के फंक्शन -

रिसोर्स मैनेजमेंट- मेमोरी मैनजमेंट, प्रोसेस मैनेजमेंट, डिवाइस मैनेजमेंट, मेमोरी एलोकेशन, इनपुट आउटपुट डिवाइस को कंट्रोल करना, फाईल सिस्टम मैनेज करना, हार्डवेयर व साॅफ्टवेयर की शेयरिंग को अलाउ करना, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को पोर्टेबल बनाना,यूजर प्रोग्राम के बीच सिक्योरिटी और प्रोक्टेक्ट करना, एरर ढॅूढना, फाॅल्ट को कम करना, रिकाॅन्फिगर करना।
एप्लीकेशन और यूजर के बीच इंटरफेस - ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर के लिए इंटरफेस का कार्य करता है
प्रोग्राम एक्ज्यूकेशन - एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर व हार्ड वेयर के बीच कड़ी का कार्य करता है, अर्थात सभी प्रोग्रामों को रन करता है।

3. ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार -

एम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम - यह ऑपरेटिंग सिस्टम हैण्ड-हेल्ड कम्प्यूटर्स अथवा डिवाइस जैसे च्क्। और स्मार्ट फोन्स में प्रयोग होते हैं। इन आॅपरेटिंग सिस्टम को रियल टाईम आॅपरेटिंग सिस्टम भी कहते है। उदा.- Windows CE
नेटवर्क कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम- इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम ऐसे कंप्यूटर में प्रयोग होते हैं जो आपस में एक नेटवर्क में जुडें होते है तथा नेटवर्क में जुडे कंप्यूटर के बीच फाईल और प्रिंटर को शेयर, डेटा को शेयर, एप्लीकेशन और कई नेेटवर्किग फंक्शन को लेन अथवा प्रोइवेट नेटवर्क के द्वारा शेयर किया जा सकता है। उदाहरण नेटवेयर popil-sir सर्वर, कमसस नेटवर्क व्ै इत्यादि।
डेस्कटाॅप ऑपरेटिंग सिस्टम - यह एक सिंगल कंप्यूटर डिवाइस पर कार्य करता है जैसे कि उंब ऑपरेटिंग सिस्टम, popil-sir 10 आदि

4. इन्टरफेस के आधार पर ओ एस के प्रकार-

ग्राफिक्स यूजर इन्टरफेस (ळन्प्) और कमाण्ड़ लाइन इन्टरफैस (ब्स्प्) ग्राफिक्स यूजर इन्टरफेस में यूजर को ग्राफिक्स आइकन का प्रयोग करके इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस से इन्टर-एक्ट करने की सुविधा प्राप्त होती है अर्थात सीधे कमांड़ के आइकन पर क्लिक करना किसी प्रकार कमाण्ड़ करने की आवश्यकता नहीं होती है ग्राफिक्स यूजर इन्टरफैस के उदा.- window के वर्जन, linux और mac आदि है। window 10 एकदम नया वर्जन है। लाइन इन्टरफेस के उदा.- MS&DOS, unix
GUI के लाभ - आसानी से कंप्यूटर को बिना किसी समस्या के आॅपरेट करना, सीखने में कम समय लगता है, गलतियों को आसानी से डिटेक्ट कर सकते हैं। WIMP(विंडोज,आइकाॅन,मेन्यू ,पाॅइंटर) की सुविधा आदि।
GUI की हानि - ग्राफिक्स यूजर इन्टरफेस में अधिक मेमोरी और तेज प्रोसेसर्स की आवश्यकता होती है। ताकि ईमेज को डिस्प्ले और उन्हें मैनुप्लेट किया जा सके।
CLI के लाभ- कमाण्ड़ लाइन इंटरफेस अधिक पाॅवरफुल तथा फ्लेक्सिबल होता है। यह अनुभवी व्यक्ति यों के लिए काफी फास्ट होता है।
CLI के हानि- इस इंटरफेस को सिखना और प्रयोग करना कठिन है। इसे सीखने के लिए अधिक ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है। इस इंटरफेस पर काम करने से पहले कमाण्ड़ याद होने चाहिए।

5. विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम के ऑपरेशन-


WYSIWYG - स्क्रीन पर प्रदर्शित ईमेज आपके पेपर की ईमेज से मिलान करना
इमेज स्कैनिंग - प्रोसेसबल ग्राफिक्स - एनीमेशन और मल्टीमीडिया सपोर्ट - दिव्यांग लोगों के लिए प्रावधान- डेस्कटॉप के इंटरफेस को दृष्टि बाधित व्यक्तियों के अनुरूप कोन्फिगर करना, कोनट्रास्ट को सेट करना, बैकग्राउण्ड़ कलर प्रोवाइड़ करना।

विंडोज 10 इन्टरफैस को समझना

1. कम्प्यूटर को बूट करना -

कंप्यूटर को शुरू और रिस्टार्ट करना बूटिंग कहलाता है। पावरलैस स्टेट से स्टार्ट होना या जब कम्प्यूटर बंद होता है और स्टार्ट करते है तो इसे कोल्ड बूट कहते हैं, परंतु जब कंम्प्यूटर पहले से स्टार्ट हो और हैंग या किसी कारण से रिस्टार्ट के बटन या विभिन्न प्रकार के कोम्बीनशन कीज और मैन्यू के द्वारा कंप्यूटर को रिबूट करना वार्म बूटिंग कहलाता हैं।

2. डेस्कटॉप एरिया -

कंप्यूटर में लोगिंग करने के बाद जो एरिया दिखाई देता है, उसे डेस्कटॉप कहते हैं। यह डेस्कटॉप बैकग्राउण्ड़ पिक्चर, आइकन और टास्कबार का समूह होता है। हम आवश्यक्तानुसार डेस्कटाॅप पर सुविधा के लिए कई एप्लीकेशन के शाॅर्टकट बना सकते हैं।

3. टास्कबार -

डेस्कटॉपके स्क्रीन के (नीचे की ओर ) बोटम में स्थित बार को टास्कबार कहते हैं। जिसे माउस बटन को दबाये हुए डैªग करके पर इस बार को किसी भी इच्छित किनारे पे छोड़कर उस जगह मूव कर सकते हैं इस बार में स्टार्ट मेन्यू होता है जिसमें शाॅर्टकट होते हैं।

4. आइकन -

एक छोटी पिक्चर जो कि एक प्रोग्राम,फोल्डर अथवा प्रोग्राम फंक्शन को रिप्रेजेन्ट करती है, आइकन होता है। आइकन पर डबल क्लिक करने पर उस आइकन के द्वारा प्रदर्शित प्रोग्राम सामग्री को देख सकते हैं।

5. सिस्टम ट्रे -

बैकग्राउण्ड़ में रन हो रहे प्रोग्राम को होल्ड़ करने के लिए जो आइकन होते हैं उन्हें सिस्टम ट्रे कहा जाता है। टास्क -बार के एक तरफ क्लोक होती है। क्लोक के नजदीक ही कई आइकन का समूह होता है जो ओपन अदृश्य प्रोग्राम को रिपे्रेजेन्ट करता है। इस एरिया को सिस्टम टेª कहते हैं। टास्कबार में मुख्य हिस्से में कभी कभार आइकन का छोटा समूह होता है जिसे क्विक -लांच बार कहा जाता हैइन आइकन पर क्लिक करने पर सम्बंधित सूचना /प्रोग्राम खुल जाते हैं।

6. टास्क -

बार कें मुख्य हिस्से में कभी कभार आइकॉन का छोटा समूह होता है जिसे क्विक-लांच बार कहा जाता है।

7. क्विक लोंच आइकन -

जब स्टार्ट बटन पर क्लिक करते है तो स्टार्ट मेन्यू खुल जाता है। स्टार्ट मेन्यू में कई प्रोग्राम के मेन्यू और डेटा का कलेक्शन होता हैै।

8. शार्टकट आइकन -

किसी भी आइकन को रिप्रेजेन्ट करने के लिंक शार्टकट आइकन होते हैं।

9. स्टार्ट मेन्यू –

windows 8,windows 8.1 मे स्टार्ट मेन्यू नहीं था जिसमें कुछ सुधार कर windows 10में वापस लाया गया है इसके साथ ही स्पेस दिया गया है जिसके द्वारा आप अपने फेवरेट app, प्रोग्राम, लोग और वेबसाइट को सम्मिलित कर सकते हैं।
अकाउण्ट ऑप्शन - अकाउन्ट नाम पर क्लिक करके अपने अकाउन्ट पिक्चर को बदल सकते हैं। डिवाइस को लोक और अकाउन्ट को साइन आउट कर सकते हैं।
पावर- इस बटन पर क्लिक करके, आप अपनी डिवाइस को स्लीप मोड़ अथवा डिवाइस को शट डाउन और रिस्टार्ट कर सकते है।
क्विक लिंक और बार-बार प्रयोग किये जाने वाले ऐप्स- स्टार्ट मेन्यू के बांयी और पीसी सेटिंग में क्विक लिंक और टॉप पर डोक्युमेंट और फाईल एक्प्लोरर होता है।
सर्च- सर्च करने के स्टार्ट मेन्यू को ऑपन करके और सर्च बाक्स में जिसे सर्च करना है उसे टाईप करेगें।
फेवरेट ऐप को पीन करना - जिन ऐप्स, प्रोग्राम्स को आप फास्ट एक्सेस करना चाहते हैं। उन्हें स्टार्ट मेन्यू पर पिन कर सकते हैं। स्टारv्ट पर क्लिक करके, ऑल एप्स को सेलेक्ट करके जिस ऐप को पिन करना हो उस पर दाय क्लिक करके पिन टू स्टार्ट सलेक्ट करके पिन कर सकते हैं। ऑल एप्स -सभी ऐप्स और प्रोग्राम को एल्फाबेटिक देख सकते हैं।
क्विक लिंक और बार बार प्रयोग किये जाने वाले ऐप्स- इस सेक्शन में बार बार प्रयोग में लिए एप्स और प्रोग्राम की होती है।

10. विण्डो एस्सप्लोरर/फाइल एक्सप्लोरर -

जब किसी फोल्डर को ऑपन करते है, तो जो विण्ड़ो दिखाई देती है। उसे विण्डो एक्सप्लोरर या फाईल एक्सप्लोरर कहा जाता है।

11. टास्क व्यू -

सभी रनिंग प्रोग्राम को टास्क व्यू पर देखा जा सकता है।

12. मल्टीपल डेस्कटॉप -

अगर कई प्रोजेक्ट पर एक साथ कार्य करना हो या अलग-अलग ंचच तथा प्रोग्राम का उपयोग करना हो तो टास्क-बार से टास्क व्यू का चयन कर एक डेस्कटॉप ऐड करें। टास्क व्यू पेज के बोटम में थम्बनेल दिखाई देगा। ब्लेंक थंबनेल पर क्लिक कर एक बिल्कुल नया डेस्कटॉप खोल सकते हैं।

13. माइक्रोसॉफ्ट ऐज –

windows 10 में इन्टरनेट एक्सप्लोरर को माइक्रोसॉफ्ट एज ब्राउजर के द्वारा रिप्लेस किया गया है और इसे डिफाल्टर ब्राउजर बनाया गया है। माइक्रोसोफ्ट ऐज पहला ऐसा ब्राउजर है जो आपको सीधे ही वेब-पेज पर नोट लिखना डूडल के बारे में बताता है और वेबपेज पर हाईलाइट करने में समर्थ बनता है।

14. विण्डो स्टोर -

विंडोज स्टोर से वीडियो,गेम्स आदि इंस्टोल कर सकते हैं। इसका आइकन टास्कबार में होता है।

15. कोरटाना -

सर्च बोक्स की तरह कार्य करता है।

बेसिक एप्लीकेशन/यूटिलिटिज

1)- केल्कुलेटर -

इसके द्वारा प्रोग्रामिंग, साइंटिफिक और स्टेटिस्किल आधुनिक गणनाएं की जा सकती है

2)- मैथ इनपूट पैनल -

यदि आप मैथेमेटिकल प्रोब्लम को शोल्व करना चाहते है अथवा कोई डॉक्यूमेंट या प्रेजेंटेशन जिसमें मैथेमेटिकल एक्सप्रेशन का उपयोग हुआ हो को कंप्यूटर में लिखना चाहते हो तो मैथ इनपुट पैनल का प्रयोग कर सकते है । यहा इनपुट पैनल, windows 10 के इन -बिल्ट फीचर मैथ रिकागनाइजर का प्रयोग करता है

3.स्निप्पिंग टूल -

स्निप्पिंग टूल की मदद से आप स्क्रीन पर किसी भी ऑब्जेक्ट का स्क्रीन शार्ट/ स्निप कैप्चर कर सकते हैं। तथा उसे ऐनोटेट सेव अथवा एक इमेज की तरह शेयर कर सकते हैं।
फ्री फॉर्म स्निप - एक ऑब्जेक्ट के चारों और फ्री फार्म शेप ड्रा करना
रेक्टेंुलर स्निप- आब्जेक्ट के चारों और कर्सर को ड्रेग कर रेक्टेंगल फार्म करना
विंडो स्निप- उस विंडोज या डायलोग बोक्स विंडो का स्लेक्ट करे जिसे आप कैप्चर करना चाहते हैं।
फुल-स्क्रीन स्निप- पूरी स्क्रीन को केप्चर करना

4. विंडोज मोबिलिटी सेण्टर-

विण्डो मोबिलिटी सेन्टर में सेटिंग्स द्वारा स्पीकर की आवाज, वायरलेस नेटवर्क कनेक्शन स्टेट्स और डिस्प्ले की ब्राइटनेस आदि एक्सेस करने का काम आता है।
ब्राइटनेस- स्लाइडर को मूव करके डिस्प्ले को एडजस्ट कर सकते हैं
वोल्यूम - स्लाइडर को मूव करके स्पीकर वोल्यूम को एडजस्ट कर सकते हैं या चेक बोक्स में क्लिक करके म्यूट कर सकते हैं।
बैटरी स्टेट्स - बैटरी में कितना चार्ज है यह दर्शाती है।
वायरलेस नेटवर्क - नेटवर्क कनेक्शन के स्टेट्स को बताती है तथा नेटवर्क कनेक्शन को ऑन या ऑफ़ कर सकते हैं।
स्क्रीन रोटेशन - स्क्रीन ओरिएंटेशन को पोट्रेट से लैंडस्केप व लैंडस्केप से पोट्रेट कर सकते हैं।
एक्सर्टनल डिस्प्ले - अतिरिक्त मोनिटर जोड़ने व डिस्पले सेटिंग को कस्टमाइज करना
सिन्टक्रोनस सेन्टर - सिंक्रोनस के स्टेट्स को देखना, नया सिंक्रोनस शुरू करना, सिंक्रोनस को पार्टनरशिप को सेटअप करना तथा सिंक्रोनस सेन्टर में सेटिंग को बदलना

5. पेन्ट -

पेंट एक ड्राइंग प्रोग्राम है इसके द्वारा ड्राइंग बना सकते हैं।

6. सिस्टम टूल्स -

सिस्टम टूल्स की मदद से डिस्क पर उपस्थित अनावश्यक फाइल को डिलीट किया जा सकता है, और डिस्क को फ्रेग्मेंट कर सिस्टम की दक्षता को बढ़ाया जा सकता है इसके लिए डिस्क डिफ्रेग्मेंटर और डिस्क क्लीन अप टूल्स का प्रयोग किया जा सकता है।
विंडोज 10 कंट्रोल पैनल और सॉफ्टवेयर इंट्रोलेशन

1. विंडोज 10 कन्ट्रोल पैनल -

सर्च बोक्स में कन्ट्रोल पैनल में टाइप करके या स्टार्ट बटन- कन्ट्रोल पैनल पर क्लिक करके कन्ट्रोल पेनल ओपन कर सकते हैं। कन्ट्रोल पेनल के निम्न ऑप्शन होते है जिसे क्लासिक बटन पर क्लिक से सभी ऑप्शन को ऑप्शन कर सकते है । सिस्टम सिक्यूरिटि, यूजर एकाउंट फेमिली सेफ्टी, नेटवर्क एंड इंटरनेट, एपीरियेंस एंड़ पर्सनाईलेजेशन, हार्डवेयर एंड़ साउंड़, क्लोक, लेंग्वेज एंड रिजन, प्रोग्रामस, एसेज ऑफ़ एक्सेस

2. सॉफ्टवेयर इंस्ट्रोलेशन -

हम हमारी इच्छा/सुविधा/ आवश्कतानुसार कोई भी सॉफ्टवेयर इंस्ट्रोल कर सकते हैं कुछ सॉफ्टवेयर विंडो 10 में होते है उन्हें भी इंस्टाल कर सकते है ।
ड्राइवर- डिवाइस ड्राइवर एक प्रोग्राम होता है। जो डिवाइस को ऑपरेट और कन्ट्रोल करता है जब हम एक्सट्रा हार्डवेयर या डिवाईसेज को कंप्यूटर से कनेक्ट करते है विडोंज 10 उनका ड्राइवर स्वतः इंस्ट्रोल कर लेता है परंतु जिनका ड्राइव विंड़ोज 10 स्वतः नहीं करता उन्हें हमें सीडी/पेन ड्राइव/ इंटरनेट के माध्यम से कर सकते है ।

विंडोज 10 में फाइल और फोल्डर के साथ काम करना

फाईल - एक फाईल या डाक्यूमेंट, डेटा का कलेक्शन होता है जिसका एक नाम होता है कम्प्यूटर में स्टोर होती है।
फोल्डर - हम फाइल को फोल्डर में रख कर व्यवस्थित रख सकते हैं। फ्लॉपी डिस्क जीप डिस्क, काम्पैक्ट डिस्क, हार्ड डिस्क आदि में फाइल को स्टोर कर सकते हैं। इन डिस्क को ड्राइव में इन्सर्ट किया और हटाया जा सकता है।
सब फोल्डर - विन्डोज फोल्डर और फाइल को एक ीपमतंबील या फाईल सिस्टम में रखना है फोल्डर जो कि अन्य फोल्डर में होते हैं। उन्हें सब फोल्डर कहा जाता है।
पार्टिशन - माई कंप्यूटर कंप्यूटर की हार्ड डिस्क के सभी पार्टिशन को शो करता है पहला पार्टिशन सी ड्राइव दूसरा डी ड्राइव इसी क्रम में आगें जितने पार्टिशन हो उन्हें शो करता है, पहले पार्टिशन सी में विंडोज इंस्ट्रोल रहती है।
डायरेक्टरी स्ट्रक्चर एवं पाथ - फोल्डर के पाथ को निम्न रूप में समझ सकते है-D:\multitech\pop.bmp इस पाथ में D:\ ड्राइव का नाम, multitech\ यह फोल्डर का नाम है pop.bmp यह फाईल है जिसका एक्सटेंशन ण्इउच होने के कारण पेंट की फाईल है।
री-नेम - हम किसी भी फाइल का नाम री-नेम कमाण्ड़ के द्वारा बदल सकते हैं। डॉट, फाइल का एक्सटेंशन फाईल टाइप की पहचान करता है। तथा उस प्रोग्राम को इंगित करता है जिसमें की इस फाइल को बनाता गया है।
रिसाईकिल बिन - इस फोल्डर में डिलीट की गई फाईल्स और फोल्डर्स को टैम्पररी स्टोर होती है। रिसाइकिल बिन से किसी फाईन को पुनः प्राप्त करने के लिए रिस्टोर कंमाण्ड का प्रयोग करते है परंतु रिसाइकिल बिन से डिलीट की गई फाईल और फोल्डर्स को एक्सेस नहीं किया जा सकता क्योंकि वो परमानेंट डिलीट हो जाती है।

chapter-4

इंटरनेट का परिचय

इंटरनेट

इंटरनेट सूचना का सुपर हाईवे के नाम से प्रसिद्ध है। यह एक वैश्विक नेटवर्क है ऐसा नेटवर्क जो यूजर्स के लिए सूचना के आदान- प्रदान का मंच प्रदान करता है। इंटरनेट में संचार के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोटोकॉल का प्रयोग किया जाता है। इंटरनेट सेवा क्लाइंट/सर्वर मॉडल पर कार्य करती है। नेटवर्क में डेटा रिसिव करने वाला कंप्यूटर क्लांइट व सेंड करने वाला सर्वर कहलाता है।

इंटरनेट को एक्सेस करना

1. इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आई एस पी) -
ऐसी संस्था अथवा संगठन जो आपको इंटरनेट का उपयोग करने की सेवा उपलब्ध कराते है आई एस पी कहलाते हैं।
2. मॉडेम -
कंप्यूटर में डेटा और सूचनाएं डिजिटल फॉर्म में संग्रहित की जाती है जबकि टेलीफोन लाइनों पर इन्फोर्मेशन (डेटा और सूचनाएं) एनालॉग वेव्स में संचारित की जाती है। अतः मॉडेम डिजिटल इनफार्मेशन को एनालॉग इनफार्मेशन में एनालॉग इनफार्मेशन को डिजिटल इनफार्मेशन में बदलता है।
आंतरिक मॉडेम - आंतरिक मॉडेम डेस्टोप या लेपटॉप कंप्यूटर में स्थापित होता है। जो नेटवर्क पर जुडे कंप्यूटरो के साथ संवाद करने के लिए काम आता है इंटरनल मॉडेम बाहरी मॉडेम से सस्ते होते हैं क्योंकि इनको पावर आपूर्ति व चेसिस की जरूरत नहीं होती है। आंतरिक मॉडेम के दो प्रकार डायल अप और वाई फाई हैं।
बाहरी मॉडेम - बाहरी मॉडेम अपनी स्वयं की बिजली आपूर्ति इस्तेमाल करता है इन मॉडेम के उदाहरण डी एस एल मॉडेम है जो ब्रांडबैंड कनेक्शन में इस्तेमाल होते हैं।
पी सी कार्ड मॉडेम - यह मॉडेम क्रेडिट कार्ड के आकार के होते हैं, जिन्हें कंप्यूटर, पोर्टेबल कंप्यूटर जैसे नोटबुक और हैंडहेल्ड कंप्यूटर में पी सी कार्ड स्लॉट में फिट किया जाता है। इसमें केवल टेलीफोन केबल अटैच की जाती है तथा यह कंप्यूटर कि बिजली का प्रयोग करते हैं।

इंटरनेट कनेक्टिविटी के प्रकार

1. डायल अप कनेक्शन - डायल अप कनेक्शन में टेलीफोन लाइन के एक छोर को फोन जैक में डाल कर कंप्यूटर पर इन्टरनेट को एक्सेस कर सकते हैं। डायल अप इंटरनेट में आप इंटरनेट और टेलीफोन का उपयोग एक साथ नहीं कर सकते हैं क्योंकि टेलीफोन का एक छोर मॉडेम से और दूसरा छोर फोन से जुडा होता है। डायल अप सबसे धीमी गति का इंटरनेट कनेक्शन है, यह एक फोन कॉल की तरह डायल-अप मॉडेम भी एक नंबर डायल करके इंटरनेट से जुड जाएगी और जब आप वेबसर्फिग खत्म कर चुके होंगे तो यह डिस्कनेक्ट हो जाएगा।
2. ब्रोडबैंड -
3. वाईफाई -
4. डी. एस. एल. - डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन सेवा एक ब्रोडबैंड कनेक्शन है जो डायल अप से अधिक तेज है। डी एस एल फोन लाइन के माध्यम से इंटरनेट से कनेक्ट होता है लेकिन इसके लिए लैंडलाइन की आवश्यकता नहीं है। यह एक बार सेटअप होने के बाद हमेशा कनेक्टेड रहता है एंव इसमें इंटरनेट व फोन दोनों को एक समय में प्रयोग किया जा सकता है।
डीजिटल सब्सक्राइबर लाइन डिजिटल डेटा को टेलीफोन लाइन्स के द्वारा संचारित करती है। इस सेवा को टेलीफोन सेवा के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक में डिजिटल डेटा को एनालॉग में बदलने की आवश्यकता नहीं होती, कंप्यूटर में डेटा सीधे डीजिटल फार्म में प्रेषित किये जाते हैं। इस प्रोद्योगिकी समूह में कंप्यूटर व टेलीफोन को सेम लाइन एवं सेम समय में इस्तेमाल कर सकते हैं।
5. केबल - केबल सेवा केबल टीवी के माध्यम से इंटरनेट से कनेक्ट करती है यद्यपि इसे पाने के लिए टीवी की जरूरत नही है। यह एक ब्रोड्बैंड कनेक्शन का उपयोग करता है और डायल अप और डीएसएल की तुलना में तेज होता है यह उन्ही स्थानों पर उपलब्ध होता है जहाँ केबल टीवी होता है।
6. उपग्रह - यह पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रह के माध्यम से इंटरनेट को जोड़ता है परिणाम स्वरूप यह लगभग दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन यह मौसम से प्रभावित होने के कारण डेटा संचार में समय लेता है जिसके कारण रियल टाइम एप्लीकेशन (गेमिंग, विडियो,कॉन्फ्रेंसिंग) के लिए कम उपयोगी है।
7. मोबाइल - 3जी और 4 जी - 3 जी और 4 जी सेवा सबसे अधिक मोबाइल फोन और टेबलेट कंप्यूटर के साथ प्रयोग किया जा रहा है। बिना वाई फाई कनेक्शन के घर से बाहर भी इंटरनेट का प्रयोग कर सकते हैं।

इंट्रानेट

इंट्रानेट एक निजी नेटवर्क है जो किसी संगठन के लिए होता है। इंटरनेट बनाम इंट्रानेट-इंटरनेट वैश्विक वल्ड वाइड वेब है जब की इंट्रानेट एक कम्पनी का निजी इंटरनेट है जिसे सिर्फ कंपनी के अंदर इस्तेमाल किया जा सकता है। इंट्रानेट का यूजर इंटरनेट पर जा सकता है लेकिन सुरक्षा कारणों जैसे कंप्यूटर के कारण इंटरनेट यूजर इंट्रानेट पर नहीं जा सकता है। इंट्रानेट बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी चल सकता है। इंटरानेट अधिक सुरक्षित और सुरक्षित निजीकृत इंटरनेट का एक संस्करण है।

एक वेबसाइट खोलना

1. वल्ड वाइड वेब-

यह एक ऑपन सोर्स इनफार्मेशन स्पेस है जहां डॉक्यूमेंट्स एवं बाकी वेब रिसोर्सेज को उनके यू आर एल से जाना जाता है, ये डॉक्यूमेंट्स एवं वेब रिसोर्सेज हाइपरटेक्स्ट लिंक द्वारा आपस में जुडें होते हैं। और इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस किये जा सकते हैं। एक विशिष्ट पेज को वल्ड वाइड वेब पर वेब पेज के नाम से जाना जाता है। इस वेब को जिस स्पेशलाइज्ड सॉफ्टवेयर द्वारा मशीन पर रन या एक्सेज किया जाता है जिसे वेब ब्राउजर के नाम से जाना जाता है। वेब पेजेज टेक्स्ट ईमेजेज, विडियोज, मल्टीमीडिया कंपोनेंट्स, वेब नेविगेशन फीचर जैसे हाइपरलिंक आदि से मिल कर बने होते हैं।
2. वेबसाइट
एक वेब साइट, वल्ड वाइड फाइलो का एक संग्रह है जिसमें प्रथम पेज को होम पेज कहा जाता है जो सबसे पहले ऑपन या सभी पेज इसी पेज के माध्यम से ऑपन या नेविगेट होते हैं।
वेब पेज अलग-2 आकार की स्क्रीन जैसे डेस्कटॉप, लैपटॉप,मोबाइल, पीडीए , टेबलेट आदि पर देखा जा सकता है।
वेब पेज को जिस कम्प्यूटर सिस्टम पर होस्ट करते हैं उसे वेब सर्वर या एच टी टी पी सर्वर भी कहते हैं।
वेब पेज स्टेटिक या गतिशील प्रकार के होते हैं।
3. यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर
किसी वेबसाइट को ऑपन करने के लिए ब्राउजर में एड्रेस बार के अंदर लिखा गया पूरा नाम यू आर एल होता है। यू आर एल एक प्रोटोकॉल (http)+ सब डोमेन नेम (www)+ डोमेन नेम multitechcomputers)+ टॉप लेवल डोमेन (.org)+ एक फाईल नाम (index.html) से मिलकर बनता है।
एच टी टी पी- यह एक एप्लीकेशन प्रोटोकॉल है। डाटा के संचार (टेक्स्ट का आदान-प्रदान या हस्तांतरण) का आधार है। यह क्लाइंट सर्वर के मध्य अनुरोध प्रतिक्रिया (रिक्वेस्ट-रेस्पोंश ) प्रोटोकॉल का कार्य करता है।
एच टी टी पी एस-एचटीटीपीएस एच टी टी पी का उपयोग कर सुरक्षित संचार करता है। इसमें डेटा की गोपनीयता, अखंडता, प्रमाणीकता रहती है।
4. डोमेन नेम सिस्टम
डोमेन नेम एक इंटरनेट एड्रेस को याद रखने के लिए एक सार्थक माध्यम है। डोमेन नेम वर्णानुक्रम होते हैं। हर बार जब हम एड्रेस बार में एक डोमेन नेम लिखते है, तब DNS सेवा इस डोमेन नाम को एक विशिष्ट आईपी पते में बदल देती है।
5. वेब ब्राउजर -
यह एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होता है। जो कि वल्ड वाइड वेब पर वेबसाइट को लोकेट (खोजने) व एक्सेज (खोलने/प्राप्त करने/देखने/प्रदर्शित करने/रन/लोड़) करने का माध्यम होता है। वेब ब्राउजर एक यूजर इंटरफेस, लेआउट, इंजन, रेंडरिंग इंजन, जावास्क्रिप्ट इंटरप्रेटर, यूजर इंटरफेस बेक एंड, नेटवर्क एवं डाटा कंपोनेंट से मिल कर बनता है।
6. ब्राउजर में प्रमुख बटनों का प्रयोग-

बैक व फॉरवर्ड बटन्स-आगे या पीछे जाने के लिए
रिफ्रेश या रीलोड बटन-
स्टॉप बटन-रिसोर्स लोडिंग को रद्द करने के लिए (कुछ ब्राउजर में रिलोड ही स्टॉप का कार्य करता है )
होम बटन-होम पेज पर जाने के लिए
एड्रेस बार-वेब साइट का नाम (यू आर एल) इनपुट करने के लिए
सर्च इंजन या सर्च बार- कुछ ब्राउजर में एड्रेस बार ही सर्च इंजन का कार्य करती है।
स्टेट्स बार- वेब पेज के लोड होने की स्थिति दर्शाने व जूम करने के बटन होते हैं।
व्यू पोर्ट- ब्राउजर विंडो में वेब पेज दृश्य देखने हेतु।
इंक्रीमेंटल फाइंड फीचर- वेब पेज के अंदर खोजना

वेब सर्च करना

सर्च इंजन - वल्ड वाइड वेब पर सम्बन्धित सूचनाओं को खोजने वाला सॉफ्टवेयर वेब सर्च इंजन कहलाता है। सर्च रिजल्ट (खोजे गए परिणामों) को ‘‘सर्च इंजन रिजल्ट पेज’’ (एस.ई.आर.पी.) कहा जाता है।
सर्च इंजन वास्तविक समय में निम्नलिखित प्रक्रियाओं को संभालता है-
1. वेब क्रालिंग (रेगना)/वेब स्पाइडर
2.इंन्डेक्सिंग (अनुक्रमण)
3.सर्चिंग (खोजना)
गूगल सर्च को सामान्यतः गूगल वेब सर्च या गूगल कहकर संबोधित किया जाता है, गूगल इनकारपोरेशन का एक वेब पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला सर्च इंजन है। गूगल के सर्च-रिजल्ट पेज का ऑडर ‘‘पेजरैंक’’ नामक पेटेंटेड प्रायोरिटी रैंक अलाग्रिथम पर आधारित है।
बिंग भी एक वेब सर्च इंजन है जिसे पहले लाईव सर्च, विंडोज लाइव सर्च एवं एम.एस.एन. सर्च (MSN सर्च) के नाम से भी जाना जाता था। इसे ‘‘डिसिजन इंजन’’ के रूप में माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विज्ञापित किया गया था। बिंग का अनावरण 28 मई 2009 को माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ स्टीव बाल्बर द्वारा किया गया।
विकिपीडीया- विकिपीडिया एक फ्री मुक्त विश्वकोश है, इस पर उपलब्ध किन्हीं भी लेखों को किसी के भी द्वारा एडिट, हटाया या संशोधित किया जा सकता है।

ई-मेल

इलेक्ट्रोनिक मेल को 1993 से मेल कहा जाता है। इंटरनेट ई-मेल के तीन भाग होते हैं। संदेश, संदेश हेडर और मैसेज बॉडी (संदेश शरीर) उसमें संदेश हैडर सूचना को जी-मेल, याहु, मेल आउटलुक एवं अन्य शामिल है।
ई-मेल का सामान्य प्रारूप लोकल पोर्ट @ डोमेन है। उदाहरण के लिए jsmith@example.org इसमें jsmith लोकल पोर्ट example.org डोमेन नेम है।
1. ई-मेल मैसेज संदेश लिखना और भेजना -
ई-मेल भेजने के लिए हमें एक कंप्यूटर में चालू (कार्यकारी) इंटरनेट, स्वयं का ई-मेल खाता, जिसे भेजना है उसके ई-मेल की आवश्यकता होती है-
ई-मेल भेजने के लिए निम्न चरणों का पालन करना पड़ता है- अपना ई-मेल खोलें-कम्पोज पर क्लिक करें- टू बाक्स में जिसे भेजना है उसका ई-मेल लिखे (एक अधिक को यह मेजेज भेजना हो तो सी सी में उनका ई-मेल लिखे/या किसी अन्य को भेजना हो और उसका यह भी पता न चले कि मेल उसके अतिरिक्त यह मेल और किसको भेजा है तो बी सी सी/ब्लाईडं कार्बन कॉपी का प्रयोग करें)-विषय (सब्जेक्ट) में मेल का शीर्षक लिखें-मैसेज एरीया में मैसेज टाईप करें-सेंड पर क्लिक करें- देखना है तो सेंड बॉक्स में देखें
2. ई-मेल फोल्डर्स
इनबॉक्स- जहाँ आने वाली ई-मेल होती है।
सेंट मेल- जहाँ आपके द्वारा भेजी गई ई-मेल होती है।
ड्राफ्ट्स- हमारे द्वारा लिखित व तैयार मेटर जब तक सेंडर को नहीं भेजा गया हो या भेजने के लिए बनाया हो।
स्पाम- ई-मेल स्पाम (जंक ई मेल) या अनचाही बल्कि ई-मेल (बहुत सारी) के रूप में भी जानी जाती है।
ट्रैश- जहाँ डिलिट किए मैसेज जमा रहते हैं
3. चेट -
इंटरनेट पर चेटिंग एक प्रकार की बातचीत है, सैद्धांतिक रूप में एक ही समय में बहुत से लोगों जो इंटरनेट पर मौजुद हो उसमें से किसी एक अथवा अधिक से किसी चेट साईट के माध्यम से मैसेज के आदान-प्रदान द्वारा बातचीत करना है।

उपयोगी वेबसाइट्स

राज्यपोर्टल, राजस्थान सरकार – http://www.rajasthan.gov.in राज्य की मुख्य वेबसाइट है जिसमें प्रमुख विभागों और संबंधित अनुभागों के लिंक है।
आवेदन भरने के लिए आरपीएससी वेबसाइट- यह राजस्थान लोक सेवा आयोग की मुख्य वेबसाइट है इस पर रिक्त पदों पर आवेदन करना, आवेदन की स्थिति ट्रेक करना व रिजल्ट देख सकते हैं।
राजस्थान आरटीई पोर्टल - राजस्थान राइट टू एजुकेशन ऑनलाइन पोर्टल/वेबसाइट निजी स्कूलो में वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो की प्रवेश प्रक्रिया को स्वचालित करने के लिए एक वेब आधारित समाधान है।
स्कूल में सीटों की संख्या, प्रवेश के लिए आवेदन, फिस प्रतिपूर्ति (Reaimbursement), फ्रॉम वितरण, जमा, लोटरी जानकारी आदि देखने के लिए किया जाता है।

अध्याय 5

डिजिटल भुगतान और प्लेटफार्म

ऑनलाइन बैंकिग

ऑनलाइन बैंकिग एक इलेक्ट्रोनिक प्रणाली है, जो वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों को संस्थान द्वारा संचालित वेबसाइट पर वित्तीय ट्रांजेक्शन। इसे इंटरनेट बैंकिंग, नेट बैंकिंग, ई-बैंकिंग या वर्चुअल बैंकिंग के रूप में जाना जाता है। इसमें सामान्यतया उपयोगकर्ता आईडी, यूजरनेम, पासवर्ड और ग्राहक सत्यापन के लिए अन्य क्रेडेंशियल्स शामिल होते हैं, आज एक सुरक्षित वेबसाइट का उपयोग करने के अलावा ट्रांजेक्शन को और सुरक्षित बनाने के लिए वित्तीय संस्थानों द्वारा ग्राहक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा गया एक पासवर्ड का उपयोग किया जाता है।
ऑनलाइन बैंकिंग के लाभ -कहीं भी, किसी भी समय बैंकिंग, ट्रांजेक्शन पर कम लागत /सामान्य लागत में कटौती, कम समय की लागत, बहुत सुरक्षित, पैसे तुरंत और सही जगह स्थानांतरित करना, घर से बैठे -बैठे यूटिलिटी बिल भरना और कई अन्य सेवाओं का लाभ लेना ।
ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से सेवाएं - बैंक खाता खोलना, शेश राशि और स्टेटमेंट की जांच करना, धन स्थानांतरित करना, फिक्स्ड डिपोजिट और अन्य निवेश करना तथा यूटिलिटी बिल, टेलीफोन व मोबाइल बिल, क्रेडिट कार्ड बिल इत्यादि का भुगतान करना, डिमांड ड्राफ्ट/चेक बुक के लिए अनुरोध करना, चेक का भुकतान रोकना, अपने डेबिट कार्ड /क्रेडिट कार्ड को ब्लोक /अनब्लोक करना, डेबिट कार्ड पिन रिजनरेट के लिए अनुरोध करना।

खाता खोले जाने की प्रक्रिया

जन -धन खाता - प्रधानमंत्री जन धन योजना भारत सरकार द्वारा अगस्त 2014 में शुरू की गई यह एक राश्ट्रीय योजना है जिसका उद्देश्य भारत के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो तक वित्तीय सेवायें, जैसे बचत व जमा बैंक खाता, प्रेशित धन क्रेडिट, बीमा, पेंशन इत्यादि, किफायती तरीको से पहुँचें।
भामाशाह सक्षम बैंक खाता -प्रत्येक परिवार को ‘भामाशाह कार्ड ’ जारी किया जाता है। यह कार्ड कोर बैंक खाते से जुड़ा हुआ है जो परिवार के मुखिया यानी घर की महिला के नाम होता है। भामाशाह कार्ड के माध्यम से कई cash benefits का उपयोग किया जाएगा और उन्हें लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधे स्थानांतरित किया जा सकेगा। आधार नंबर के साथ भामाशाह नामांकन किया जा सकता है।

ऑनलाइन/ डिजिटल भुगतान पद्धतियां और प्लेटफ्रोम

एक डिजिटल भुगतान प्रणाली ट्रांजेक्शन के लिए इलेक्ट्रोनिक भुगतान की स्वीकृति प्रदान करती है, डिजिटल भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट और कई अन्य भुगतान मोड़ के माध्यम से किया जाता है।
क्रेडिट कार्ड भुगतान - यह एक प्लास्टिक कार्ड के रूप में होता है। एक क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन भुगतान करने के स्टेप-
डेबिट कार्ड/ बैंक कार्ड/चेक कार्ड -
रूपे कार्ड भुगतान- यह रूपये और पेमेंट का एक संयोजन है। भारत के राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा बनाया व लॉच किया गया है।
नेट बेकिंग भुगतान- यह इंटरनेट बैकिंग सबसे लोकप्रिय भुगतान की विधि है। इसके अंदर हमें बैंक खाता खुलवाने के लिए नेट बैंकिग का फार्म भर कर इस सुविधा को ले सकते है जिससे हमें बैंक द्वारा यूजर आई डी व पासवर्ड मिलता है, जिसका उपयोग करके हम किसी भी खाते में अमाउंट ट्रांसफर व खातें की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा भुगतान की सुरक्षा के लिए हमारे मोबाइल पर वन टाईम पासवर्ड OTP आता है।
Pop प्वाइंट ऑफ़ सेल- यह एक इलेक्ट्रोनिक उपकरण है जिसका इस्तेमाल खुदरा (रिटेल) स्थानों पर कार्ड लगाकर भुगतान की सुविधा देती है। इसके द्वारा ट्रांजेक्शन के उपरांत रशीद भी प्रिंट होती है।

मोबाइल भुगतान

मोबाइल डिवाईसेज का उपयोग करके ट्रांजेक्शन करना मोबाइल भुगतान कहलाता है। इस प्रकार के भुगतान मोबाइल मनी, मोबाइल वॉलेट, डिजिटल वॉलेट के नाम से भी जाना जाता है।
मोबाइल /डिजिटल वॉलेट
मोबाइल वॉलेट भौतिक वॉलेट /बटुए का डिजिटल समतुल्य है जिसमें हम पैसे रखते हैं। इसके लिए एक खाता बनाकर डेबिट, क्रेडिट, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन या नकदी के माध्यम से पैसा जमा करा सकते हैं। उदा.-
पेटीएम -पे टी एम को paytm.com या गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड़ कर सकते है। पे टी एम ऐप में लॉगइन करके हम ट्रांजेक्शन, पैसे डालने, बैलेंस व लेन देन को चेक करने, अन्य पे टी एम धारक को भुगतान करने,बिलों का भुगतान, मोबाइल रिचार्ज, फिल्म ट्रेन बस हवाई- जहाज, ईवेंट टिकट आदि भी बुक कर सकते हैं।
फ्रीचार्ज -यह चेट और पे दोनों सुविधा देता है, तथा यह स्लिप्ट बिल जैसी भी सुविधा देता है, इसके द्वारा प्रिपेड व पोस्टपेड मोबाइल, डी टी एच व डाटा कार्ड रिचार्ज आदि कर सकते हैं।
स्टेट बैंक बडी - यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बनाया गया एक मोबाइल वॉलेट है इसके द्वारा भी पैसे भेजना, अपना विवरण देखना, प्रीपेड मोबाइल और डी टी एच रिचार्ज करना, बिलो का भुगतान करना, मूवी टिकट बुक करना, व ऑनलाइन मर्चेंट भुगतान करना आदि है।
यूनिफाईड पेमेंट इंटरफेस (UPI) - यह भारत के सभी खुदरा प्रणालियों के लिए राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा विकसित किया गया तथा इसके द्वारा स्मार्ट फोन के द्वारा दो बैकों के बीच M-PIN से ट्रांजेक्शन की सुविधा ऑनलाइन या ऑफलाइन रूप में देता है, इसमें किसी क्रेडिट कार्ड विवरण/IFSC कोड नेट बैकिंग या वॉलेट विवरण की आवश्कता नहीं होती है।
भीम - यह एक एकीकृत भुगतान समाधान एप्लिकेशन है। इसके लिए भीम ऐप द्वारा अपने मोबाइल नं. को यू पी आई से साइन अप करके M-PIN या QR code द्वारा डिजिटल ट्रांजेक्शन का लाभ ले सकते हैं।
यूएसएसडी - USSD द्वारा मोबाइल बैंकिंग ट्रांजेक्शन में स्मार्ट फोन या इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती है। यह सेवा मोबाइल फोन पर *99# डायल करके इस्तेमाल की जा सकती है। जो सभी दूरसंचार सेवाओं में एक समान होती है यह हिंदी, अंग्रेजी सहीत कई भाषाओं में होती है, USSD में हर बैंक की ट्रांजेक्शन लिमिट भिन्न होती है इसमें MMID-(mobile money identifier) और M-PIN के द्वारा होता है।
इसके द्वारा हम बैलेंस पूछताछ, मिनी स्टेट्मेंट, फंड ट्रांसफर, MMID जानें, M-PIN बदलें, OTP उत्पन्न करना आदि कार्य कर सकते है।
आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS)- Aadhaar Enabled Payment Sysment मशीन को माइक्रो एटीएम कहा जाता है। जो पी ओ एस के समान क्रेडिट व डेबिट कार्ड को स्वीकार करती है। भुगतान के लिए इसमें आधार से जुडे़ अकाउंट से फिंगर प्रिंट का यूज करके भुगतान किया जा सकता है।
गुगल तेज ऐप- यह गुगल द्वारा भारत के यूजर्स के लिए मोबाइल पेमेंट सर्विस है TEZ का अंग्रेजी में अर्थ फास्ट है।

अध्याय 6

इंटरनेट के अनुप्रयोग

ई-कॉमर्स

इलेक्ट्रोनिक कॉमर्स किसी भी सामान को इलेक्ट्रोनिक माध्यम (प्रमुख तौर पर इंटरनेट) से खरीदा या बेचा जाए, उसे ई- कॉमर्स कहते हैं।
1. व्यापार से ग्राहक/उपभोक्ता (B2C)
2. व्यापार से व्यापार (B2B)
3. ग्राहक से व्यापार (C2B)
4. उपभोक्ता से उपभोक्ता (C2C)
5. मोबाइल कॉमर्स (M Commerce)

ई- कॉमर्स /एम- कॉमर्स के लाभ-

सुविधा - ई- कॉमर्स के इन नए तरीके को ग्राहक के पास एक 24 घंटे खुला रहने वाला वर्चुअल स्टोर हो गया है।
उत्पाद की श्रंखला-इसमें असीमत सामान होते हैं।
पैसे की बचत - ई- कॉमर्स कंपनी/विक्रेता को ग्राहक/उपभोक्ता के और करीब ले जाता है। इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ती है और उत्पाद क्षमता भी। कीमत में कमी ई- कॉमर्स का एक महत्वपूर्ण लाभ है।
भुगतान के विकल्प - जैसे इंटरनेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, चेक, केश ऑन डिलीवरी।
सामान लौटाना - ग्राहक उत्पाद या सेवा से संतुष्ट न होने पर वापस कर सकता है।
राजस्थान ऑनलाइन स्टोर- राजस्थान सरकार ने E-bazaar पोर्टल शुरू किया है जिसके माध्यम से राज्य के सभी नागरिक उचित किमत पर विभिन्न वस्तुओं को आसानी से खरीद सकते हैं। इसमें अपने आर्डर को http://www.ebbazzaar.rajasthan.gov.in मे माध्यम से दर्ज करके सभी आर्डर को जिला डाकघर में उपलब्ध emitra kiosks से ओटीपी नम्बर बता कर प्राप्त कर सकता है।
ऑनलाइन शोपिंग वेबसाइटें- फ्लिपकार्ट, अमेजन, स्नेपडील,पेटीएम, जबोंग, शोपिंग क्लू, ई-बे आदि।

सोशल नेटवर्किंग साइट्स

फेसबुक के जरिये हम परिवार और दोस्तों के साथ संपर्क बना सकते है । सन् 2004 में इसकी स्थापना मार्क जूकरबर्ग द्वारा की गयी थी। फेसबुक आत दुनिया भर में सबसे बड़ी नेटवर्किंग साईट है आज इसके दुनिया भर में 1 बिलियन से ज्यादा यूजर है। फेसबुक द्वारा मैसेज/फोटो/लिंक भेजने, स्टेटस अपडेट व शेयर कर सकते हैं। ई-मेल में संदेश प्राइवेट होते है जबकि फेसबुक संदेश प्राइवेट व निजी दोनों प्रकार के होते हैं।
1. फेसबुक-
फेसबुक के मुख्य पब्लिक फीचर इस प्रकार है-
मार्केटप्लेस -सभी मेम्बर को क्लासिफाईड विज्ञापन पोस्ट करने, पढ़ने एवं प्रतिक्रिया व्यक्त करना आदि।
ग्रुप्स - समान रूची वाले मेम्बर आपस में संपर्क व वार्तालाप कर सकते हैं।
इवेंट्स- इवेंट की जानकारी व लोगों को आमंत्रित करना।
पेजेज - किसी टॉपिक से संबधित पेज बनाना।
प्रेजेंस टेक्नोलॉजी - ऑनलाईन मेम्बर की जानकारी देखने की सुविधा।
2. ट्विटर -
जो यूजर को 140 करैक्टर के छोटे संदेश भेजने व पढ़ने की सुविधा देता है जिन्हें “tweets” कहा जाता है। वर्तमान में ट्विटर के दुनिया भर में 25 कार्यालय है और इसकी स्थापना सन फ्रसिस्को में हुई थी।
ट्वीट- यह एक संदेश का टुकड़ा है जो की अधिकतम 140 करेक्टर का हो सकता है।
टाइम लाइन्स -ट्विटर में सभी यूजर अपनी टाईम लाईन बना सकते है जिसे कोई भी ट्विटर यूजर देख सकता है। तथा अन्य यूजर हमारे ट्विट को फोलो कर सकते हैं।
ट्विटर प्रोफाइल-सेटिंग लिंक द्वारा हम हमारी प्रोफाईल को एडिट कर सकते हैं
फोलोविंग और फोलोवर्स -किसी के ट्विट को लगातर पढ़ने के लिए उसे फोलो कर सकते हैं।
वार्तालाप -
सीधे संदेश -यह प्राइवेट होते हैं। सिर्फ प्रेशक और पाने वाला ही उन्हें देख सकता है। आप इस प्रकार के संदेश सिर्फ उन लोगों को भेज सकते हैं जो आपको फोलो करते हैं।
जिन ट्विटस में आपको मेंशन किया जाता है। वो ट्विटस जानने के लिए ट्विटर पेज के राईट साइड पर @username पर क्लिक करें। किसी को अपने ट्विट निर्देशित करने के लिए @username से शुरू करें, इसमें /@username वो है जिसे आप अपना ट्विट भेजना है।
अपने फोलोवेर्स को अपना ट्विट दिखाने या किसी को विशेश रूप से भेजने के लिए, आप शुरूआत की जगह और कही पर /@username लिख दें ।
री-ट्वीट -जब कोई दूसरा आपके ट्वीट को उसके खुद के फोलोवर्स को दिखाना चाहता हो तो इसे रीट्वीट कहते हैं।
हेशटैग -हेशटैग से आप अपने ट्विट में किसी केटेगरी या की-वर्ड जोड़ सकते हैं। हेशटैग आजकल ट्वीटर पर सर्चेज के लिंक में उपलब्ध होते है ।
3.लिंक्ड इन-
मुख्य रूप से यह पेशेवर नेटवर्किंग के उद्देश्य से बनायी गई है। प्रमुख विशेशताएं-
1. संपर्क में रखें -
2. मदद लेना -
3. नौकरी ढूढना -
4. नए स्टाफ का अपोइंटमेंट -

ई-लर्निंग /ऑनलाइन शिक्षा

ई-लर्निग में पाठ्य सामग्री आपको विडियों, स्लाइड शो, वर्ड डोक्यूमेंट्स और पी डी एफ में उपलब्ध होती है। यह पारंपरिक शिक्षा के मुकाबले तेज, सस्ता और बेहतर है।
1)MOOC (Massine Open Online Courses)-
यह एक ऑनलाइन कोर्स पोर्टल है जो लोगों को ऑनलाइन कोर्सेज के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम है MOOC Distanse education को पहली बार 2008 में शुरू किया गया था MOOC विद्यार्थियों शिक्षकों, शिक्षक सहायकों के बीच एवं प्रभावी इंटरैक्टिव मंच प्रदान करता है।
एडएक्स(Edx)- यह विशाल ऑपन ऑनलाइन कोर्स MOOC प्रदाता कंपनी है यह विश्व भर के छात्रों के लिए अलग-अलग विशयों में यूनिवर्सिटी स्तर के कोर्सेज कराती है एवं कहीं कार्सेज फ्री भी उपलब्ध है।
युडेसिटी -
कोर्सएरा courser- यह एक लाभकारी शैक्षणिक प्रौद्योगिक संगठन है।
खान अकादमी - यह एक गैर-लाभकारी शिक्षा संस्था है जो शिक्षा प्राप्ति के लिए सरल एवं सुलभ मंच प्रदान करती है। यह व्याख्यान के छोटे छोटे यू ट्यूब वीडियो उपलब्ध कराती है।
2)- आजीविका पोर्टल, राजस्थान सरकार -
-रोजगार विनिमय अधिनियम 1959 और, नियम1960 के प्रावधानों को सुनिश्चित करना ।
-नौकरी तलाशने वालो को विभिन्न रोजगार योजनाओं के बारे में जानकारी एकत्र कर प्रसारित करना ।
-SC,ST,OBC, दिव्यांग, महिला कमजोर वर्ग के नौकरी चाहने वालो की सहायता के लिए विशेश योजना बनाना ।
-निम्नलिखित निकायो के skilled manpower date का विलय करना और राज्य के लिए कौशल पूल बनाने में मदद करना जैसे- आरकेसीएल (राजस्थान नॉलेज कारपोरेशन लिमिटेड), आरएसएलडीसी (राजस्थान स्किल एण्ड लाइवली हुड डेवलपमेंट कारपोरेशन ), आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान )
3)-राज ई-ज्ञान -
यह मूल रूप से राज्य बोर्ड के स्कूल छात्रों के लिए महत्त्वपूर्ण ई-शैक्षिक सामग्री का एकमात्र श्रोत है। पोर्टल पर http://egyan.rajasthan.gov.in के माध्यम से पहुचा जा सकता है, इस पोर्टल पर स्कूल और शिक्षक भी उनके द्वारा तैयार की गई सामग्री को अपलोड़ कर सकते हैं।
4)-उच्च और तकनीकी शिक्षा पोर्टल, राजस्थान सरकार -
1. उच्च शिक्षा अंतर्गत डीसीई (कोलेज शिक्षा विभाग )
2. तकनीकी शिक्षा अंतर्गत डीटीई (तकनीकी शिक्षा निदेशालय )
यह पोर्टल छात्रों को विभिन्न सरकारी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने मै भी मदद करता है।
5)-आईआईटी द्वारा मुफ्त पाठ्यक्रम –
Nation Programme on Technology Enhanced Learning(NPTEL) मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) द्वारा प्रायोजित प्रोजेक्ट जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और मानविकी में ऑनलाइन वेब और वीडियो पाठ्यक्रमों के माध्यम से ई-लर्निंग की जा सकती है।
6)- स्वंय पोर्टल – SWAYAM-
http://SWAYAM.gov.in प्लेटफार्म मानव संसाधन विकास मंत्रालय और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिशद (AICTE) द्वारा स्कूल, अंडर -ग्रेजुएट, स्नातकोत्तर, इंजीनियरिंग, कानून और अन्य व्यवसायी कोर्स को कवर करने के लिए विकसित किया गया है।

ऑपन रिसोर्स /क्लाउड बेस्ड स्टोरेज

राज ई -वॉल्ट- Raj-eVault को डिजिटल दस्तावेज प्रबंधक भी कहा जा सकता है। ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर ग्रेजुएशन मार्क शीट्स तक के सभी प्रकार के दस्तावेज और प्रमाण पत्र ई- वॉल्ट में अपलोड़ किए जा सकते हैं। इसके अलावा, आप अपने दस्तावेजों को किसी भी समय कही भी एक्सेस कर सकते हैं। यह आपके दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सत्यापित करने का एक सुविधाजनक तरीका है।

क्लाउड स्टोरेज

क्लाउड स्टोरेज, डाटा स्टोरेज का एक मॉडल है,जहाँ डिजिटल डाटा लोजिकल पूल में स्टोर किया जाता है। फिजिकल वातावरण को एक होस्टिंग कंपनी संभालती है। यह इन कंपनियों की जिम्मेदारी है की फिजिकल वातावरण सुचारू रूप से चलता रहें, डाटा हमेशा उपलब्ध रहें और सुरक्षित रहें। प्रचलित क्लाउड स्टोरेज सर्विस निम्न प्रकार है-
गूगल ड्राइव- अगर आपके पास गूगल अकाउंट है, तो आसानी से drive.google.com टाइप करके इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस 15GB स्टोरेज में आप डाक्यूमेंट्स, चित्र, विडियो, फोटोशॉप फाइल इत्यादि अपलोड़ कर सकते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट वन ड्राइव- यह माइक्रोसॉफ्ट का उत्पाद है जो कि विंडोज 8 या विंडोज 10 में होता है।
ड्राप बॉक्स- यह सबसे पसंदीदा, इंस्टॉलेशन में आसान, भरोसे मंद, प्रयोग करने में सरल है जिसे ड्राप बॉक्स की वेबसाइट से एक्सेस कर सकते हैं व विंडोज, मैक, एड्रांइड और लिनक्स में चल सकता है।
बॉक्स - बॉक्स में हम फाईलों को दूसरे यूजर के साथ शेयर कर सकते हैं, किसी को काम दे सकते हैं और फाईल में बदलाव की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

जॉब सर्च और रेजिस्ट्रेशन

रोजगार विभाग, राजस्थान सरकार -रोजगार विभाग द्वारा बेरोजगार युवाओं के लिए http://www.employment.livelihoods.rajasthan.gov.in पोर्टल बनाया है। इस में नौकरी के जरूरत मंद व्यक्ति रजिस्टर कर सकते है तथा इस पर बेरोजगारी भत्ते का विवरण, विभिन्न पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण की सुविधा के लिए मार्गदर्शन की सुविधा भी उपलब्ध है।
निजी नौकरी वेबसाइट्स -
Noukri.com- 1997 में बना कंपनियों व क्लाइंट्स का एक ऑनलाईन जॉब मैसेनजर्स नेटवर्क नौकरी पोर्टल है। उदा.- आई टी, मार्केटिंग, सेल्स, मेडिकल, हेल्थ और फार्मा आदि से संबंधित कंम्पनिया शामिल है।
मॉन्स्टर डॉट कोम -यह भी लोकप्रिय नौकरी प्रदाताओं (Employers) व नौकरी चाहने वाला (job seckers) का वेब पोर्टल है।
टाइम्सजोब्स डॉट कोम - यह टाइम्स समूह की सहायक कंपनी है जिसमें जॉब सीकर्स वर्क पार्टफोलियो व वर्क सेम्पल को एम्प्लोयर्स के साथ शेयर करने की अनुमति देती है।
नेशनल करिअर सर्विसेज - http://www.ncs.gov.in प्रोजेक्ट श्रम और रोजगार मंत्रालय एम्प्लोयर्स को सही कौशल प्रदान करने के लिए भारत सरकार का पोर्टल है।
ऑनलाइन आवेदन जमा करना - http://www.rajasthan.gov.in पोर्टल में सर्विसेज लिंक पर क्लिक करके विभिन्न विभागों से संबंधित आवेदन जमा कर सकते हैं।
राजस्थान लोकसेवा आयोग - http://rbse.rajasthan.gov.in RPSC Online portal से किसी भी सरकारी रिक्ती की जानकारी, ऑनलाइन आवेदन स्वीकारना, आवेदन की स्थिति ट्रेक करना स्टेट्स देखना व एस एम एस द्वारा अपडेट व पीडीएफ रशीद प्राप्त करना।
राजस्थान अधीनस्थ और मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड - RSMSSB ने एक पोर्टल http://www.rsmssb.rajasthan.gov.in शुरू किया है जिससे विभिन्न पदों की जानकारी व संबंधित पोस्ट के पिछले प्रश्न पत्र देख सकते हैं।

डिजिटल हस्ताक्षर

डिजिटल हस्ताक्षर पीडीएफ डाक्यूमेंट, ई-मेल संदेश, वर्ड प्रोसेसिंग डाक्युमेंट्स का प्रयोग किया जा सकता है। डिजिटल हस्ताक्षर एक छोटे खंड के रूप में होता है जो की डिजिटल आई डी से बनाया जाता है जिसमे privet व public शामिल है public key में एन्क्रिप्टेड कोड होतो है जिसे ‘हैश’ कहते हैं।
राज ई-साइन - राजस्थान सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के राज ई साइन का वैध डिजिटल हस्ताक्षर के रूप में मान्य/अधिकृत किया है। यह एक इलेक्ट्रोनिक ई-साइन सर्विज है। ई-साइन की विशेषताएं - आसान और सुरक्षित, कानूनी तौर पर मान्य हस्ताक्षर की सुविधा, लचीला और लागू करने में आसान, राज ई-साइन वैद्य इलेक्ट्रोनिक हस्ताक्षर सेवा, ई-गवर्नेंस के अनुपालन से सुरक्षित ऑनलाइन सेवा, राजस्थान फ्रेमवर्क, निजी कार्यो के लिए 1 जी बी मेमोरी।

अध्याय 7.

राजस्थान के नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाएं

राजस्थान में ई -गवर्नेस

गवर्नमेंट टू सिटिजन्स (G2C)गवर्नमेंट टू बिजनेस(G2B) गवर्नमेंट टू एम्प्लोई (G2E) गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट (G2G) बैंक -ऑफिस प्रक्रियाओं आदि राजस्थान की ई -गवर्नेस सेवाएं है-
1)-ई-गवर्नेस के प्रमुख लाभ-
नागरिकों के लिए सूचना और गुणवत्ता सेवाओं तक बेहतर पहुच, सरकार में सरलता ,कार्यक्षमता और जवाब देही, शासन की विस्तारित पहुच आदि।
2)-राजस्थान में ई -गवर्नेस के प्रमुख कार्यक्रम-
हर नागरिक के लिए ई-गवर्नेस - नागरिकों के लिए (भामाशाह/ई-मित्र /राजसंपर्क) सरकारी अधिकारीयों के लिएHRMS/E-Office/IFMS/E-PROCUREMENT संचार
राजस्थान स्टेट डाटा सेंटर एवं नेटवर्क ओपरेटिंग सेंटर - 100 mbps डेडिकेटेड कनेक्टिविटी, 200 से अधिक वेबसाइट्स, पोर्टल और एप्लीकेशन की होस्टिंग
राज मेघ - दी राजस्थान क्लाउड – SASS(software as a service),paas (platform as a service) की क्लाउड सेवा।
राज नेट -दी राजस्थान नेटवर्क - ग्राम पंचायत स्तर तक LAN/SWAN/Broadband/Over-the-air/satelite माध्यम से सहज कनेक्टिविटि
राज धारा -दी राजस्थान जीआईएसएस- डीएसएस - सरकारी विभागों व संगठनों द्वारा शेयर किया गया Seamless Geographic Information System
राज सेवा द्वार -राजस्थान सेवा वितरण गेटवे -
राजस्थान एकल साइन ऑन और राज्य पोर्टल - राजस्थान के हर नागरिक के लिए एक व्यक्ति एक पहचान की व्यवस्था
राज ई -वॉल्ट - एंड डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट-दस्तावेजो व हलफनामो को पेपर लेस बनाना
राज ई -साइन - Qrफत और फोटो सक्षम डिजिटल हस्ताक्षर प्रणाली
राज एइएम - वेब कंटेंट मेनेजमेंट प्लेटफार्मs
आरएएएस - जी पीएस मानिट्रिंग और बायोमट्रिक उपस्थिति प्रणाली

ई-मित्र (2004)

राज्य के सभी जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ई-मित्रों के माध्यम से 250 से अधिक और सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है, ई-मित्र सेवा केंद्र एवं कियोस्क -सार्वजनिक -निजी भागीदारी मॉडल पर चलाए जा रहे हैं ।
ई-मित्र के उद्देश्य - नागरिकों को विभिन्न सरकारी और निजी संगठनों की विभिन्न सेवाओं को एक ही जगह उपलब्ध कराना, इससे नागरिकों को समय की बचत होती है एवं उन्हें अलग -अलग ऑफिस के चक्कर काटने से राहत, महिलाओं को व्यावसायिक अवसर, सेवाओं का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करना, किसी भी समय व कहीं भी वेब, मोबाइल, कियोस्क द्वारा सेवा

एमएसओ के माध्यम से सेवाओं की सूची -

कीओस्क के माध्यम से- http://emitra.rajasthan.gov.in द्वारा
गवर्नमेंट टू कस्टमर -
वाणिज्यिक कर कर विभाग:- आरटीआई सेवाओं के लिए ऑनलाइन जमा और शुल्क जमा करना।
जयपुर विकास प्राधिकरण:- विभिन्न योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र और फीस जमा करने के लिए।
मनरेगा सेवाएं:- न्यू पंजीकरण व नौकरी कार्ड जारी करना। नगर निगमः- विभिन्न देय शुल्क का भुगतान ।
पंचायती राजः- डिजिटली हस्ताक्षरित ‘‘आवासीय भूमि की लीज’’ के लिए आवेदन जमा करना और उसे जारी करना।
बिजनेस टू कस्टमर - एयरटेल, आइड़िया, वोडाफोन, एमटीएस का बिल भुगतान, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस की बीमा सेवाएं, एलआईसी प्रीमियम भुगतान, प्रीपेड मोबाइल रीचार्ज (बीएसएनएल , वोडाफोन, एयरटेल, आइड़िया, रिलायंस , टाटा, आदि), डीटीएच रिचार्ज ( टाटा स्काई, बिग टीवी, डिश टीवी, अक्ष आईपीटीवी आदि ), अमेजॅन ऑनलाइन बाजार, डॉक्टर सेवाओं के लिए, एलईडी बल्ब का वितरण, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड के लिए ।
घर से – SSOlongin सवहपद कर बहुत सी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

भामाशाह योजना

यह योजना एक परिवार आधारित कार्यक्रम है, जहां प्रत्येक परिवार को ‘भामाशाह कार्ड’ जारी किया जाता है। यह कार्ड एक मुख्य बैंक खाते से जुडा हुआ है, जो घर की महिला के नाम पर है। भामाशाह कार्ड बायोमट्रिक पहचान और कोर बैंकिंग का इस्तेमाल करता है। राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले नकद और गैर -नकद लाभों का भुगतान भामाशाह कार्ड के जरिए किया जायेगा और लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित किया जाएगा ।
नामांकन प्रक्रिया - भामाशाह योजना में नामांकन ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों प्रकार से किया जा सकता है।
निवासी निम्नलिखित किसी भी सेवा के लिए अनुरोध कर सकते हैं: जैसे - परिवार में नया जन्म, परिवार में किसी व्यक्ति का विवाह, परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु, पते में बदलाव, किसी भी जानकारी में परिवर्तन जैसे कि बैंक अकाउंट में परिवर्तन, नामांकन के समय दी गयी जानकारी में सुधार
भामाशाह कार्ड - दो प्रकार के भामाशाह कार्ड होते हैं -पारिवारिक कार्ड और व्यक्तिगत कार्ड
1.पारिवारिक कार्ड -भामाशाह कार्ड राज्य सरकार द्वारा परिवार की महिला मुखिया के लिए निःशुल्क जारी किया जाता है, जिसमें पूरे परिवार के बारे में आवश्यक जानकारी दी जाती है। भामाशाह कार्ड, यूआईडी (आधार) बनाने के दौरान अंकित की हुई बायोमेट्रिक पहचान का इस्तेमाल करता है और मुख्य बैंक /सक्षम बैंक खाते से संबंध सुनिश्चित करता है।
2.व्यक्तिगत कार्ड - नामांकित परिवार का कोई भी सदस्य मामूली शुल्क का भुकतान करके व्यक्तिगत भामाशाह कार्ड प्राप्त कर सकता है। यह कार्ड, पहचान पत्र होने के साथ -साथ, व्यक्ति को राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अधिकारों की पात्रता भी दर्शाता है, जैसे पेंशनभोगी, असंगठित श्रमिक आदि।

राजस्थान संपर्क (जून 2014)

राजस्थान संपर्क एक नवाचारी ई-गवर्नेस प्रोजेक्ट है। जिसके माध्यम से अपनी शिकायत का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। शिकायतों के पूरी तरह से निवारण और प्रभावी निगरानी के लिए जरूरी है।
उद्देश्य - निवासियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए अनुकूल, पारदर्शी, जवाबदेह, प्रभावी, कुशल और स्वचालित शिकायत दर्ज करने और शिकायत निस्तारण करने का तंत्र है जिसमें शिकायत निवारण प्रक्रिया की गति और दक्षता में वृद्धि होती है तथा निवासियों की शिकायत के अप -टू -डेट स्टेट्स प्रदान कर सशक्त बनता है।
लाभ- समय, धन, एफर्ट की बर्बादी से राहत, दस्तावेजों के गुमने की समस्या नहीं।
शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र प्रक्रिया -
पंजीकरण - शिकायत पंजीकृत /दर्ज राजस्थान संपर्क मोबाइल ऐप, वेब पोर्टेट, ई-मित्र कियोस्क, विभिन्न कार्यालयों में आईटी केंद्र, कॉल सेंटर (एसएमएस और टोल फ्री नंबर सुविधा के साथ ), के माध्यम से की जा सकती है।
रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण ) के बाद ,निवासी को सिस्टम द्वारा प्राप्त शिकायत आईडी द्वारा भविष्य में शिकायत को टैªक करने, इसे पुनःखोलने, फीडबैक देने कार्य कर सकते हैं।
मोडरेशन - शिकायत की स्वीकार्यता का पता लगाना, स्वीकार्य शिकायत को पुनःजांच करना, गलत विभाग की शिकायत को सही करना, शिकायत से सम्बंधित रिकार्ड्स की पहचान कर प्राथमिकता तय करना और पृथक्करण कर निवारण प्रक्रिया आरंभ करना।
आवंटन - मोडरेटर शिकायत को निवारण के लिए शिकायत से सम्बंधित अधिकारी को आवंटित करना
निराकरण - शिकायत को ‘राहत’ या ‘अस्वीकार’ के रूप में मामले की योग्यता के आधार पर शिकायत को ‘दुविधा’ या ‘आंशिक कार्यवाही श्रेणी’ के तहत रखना अथवा इन्हें संबंधित अधिकारियों के इनबाक्सक्स में’ अंतिम डिस्पापोजल के लिए लंबित के रूप में मार्क करना

ई-पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम

भारत में ई-पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम या ई-सार्वजनिक वितरण प्रणाली खाद्य की कमी से निपटने तथा समाज के गरीब लोगों को सस्ती कीमत पर अनाज का वितरण करना है इसमें लगभग 4 लाख से अधिक उचित मूल्य की दुकानों (फेयर प्राइस शॉप ) के माध्यम से करीब 16 करोड़ परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है
लाभ कैसे प्राप्त करें - केंद्र और राज्य एक व्यापक प्रक्रिया के माध्यम से बीपीएल (राशन कार्ड) परिवारों को गेहू, चावल, चीनी और मिट्टी का तेल (केरोसिन ) आदि फेयर प्राइस शॉप (राशन की दुकान या उचित मूल्य की दुकानों) द्वारा उपलब्ध कराना।
राशन कार्ड, राज्य सरकार के आदेश या प्राधिकरण के तहत जारी एक फाइल /कार्ड है जो राज्य सरकार गरीबी रेखा से ऊपर, गरीबी रेखा से नीचे और अंत्योदय परिवारों के लिए जारी करता है।
ई-मित्र /सीएससी पर राशन कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया- फॉर्म डाउनलोड़ कर सभी आवश्यक जानकारी व आवश्यक दस्तावेज (मतदाता पहचान पत्र एक 2 रूपये का अदालत शुल्क टिकट) संलग्न करना पड़ता है। आवश्यक दस्तावेजों का उल्लेख नीचे दिया गया हैः
आवासीय प्रमाण - कर भुगतान की रसीद, किराया समझौता, बैंक की पासबुक, बिजली बिल, टेलीफोन बिल या अन्य उल्लेखित किसी भी दस्तावेज का उपयोग आवासीय प्रमाण के रूप में किया जा सकता है।पूरे दस्तावेज संलग्न करने के बाद आवेदक को अपने क्षेत्र के कार्यालय पर फॉर्म जमा कराना होगा । आवेदन जमा करने के बाद, आवेदक को एक पावती स्लिप दी जाएगी जिसमें राशन कार्ड मिलने की तारीख और समय का उल्लेख किया जाएगा ।

ज्योग्राफिकल इनफार्मेशन सिस्टम -राजधारा

जीआईएस डिसिशन सपोर्ट सिस्टम राजधरा का उद्देश्य ओजीसी -मानको पर आधारित एक भू पोर्टेट को विकसित करना है जिसके द्वारा भू -स्थानिक डेटा का अधिग्रहण, प्रोसेस, संग्रहण, वितरण और नियमित रूप से सुधार किया जा सके । यह नागरिको को एक सिंगल विंडो सेवा प्रदान करती है, जिससे सभी विभागीय एजेंसियों जैसे चिकित्सा और स्वास्थ्य, पुलिस, यूटिलिटीज, बिजली, वाणिज्यिक, जल संसाधन, शिक्षा, वानिकी, कृषि, शहरी विकास आदि की कार्यक्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होगी।

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना एक योजना है जिसका उद्देश्य आईपीडी (आतंरिक रोगी विभाग ) में रोगियों को नकद रहित (कैशलेस ) सुविधा प्रदान की जा सके ।
उद्देश्य- ग्राहकों के लिए बीमारी के समय अतिरिक्त खर्च में कमी करते हुए वित्तीय कवर की पेशकश करना ।
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभ:- अस्पतालों के लिए इन हाउस क्लेम प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर एवं मानकीकृत और पारदर्शी गे्रडिंग मापदंड, सत्यापित और सुपरिभाशित चिकित्सा प्रोटोकोल, मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा जिलें में सभी सरकारी अधिकारियों की निगरानी एवं स्वास्थ्य सेवाओ हेतु गरीबों के लिए निजी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा उपचार कराने का अवसर।
योजना के लाभार्थी - राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सभी परिवार इस योजना का लाभ उठा सकते है। इसमें परिवार के माता/पिता, 25 वर्ष से कम या अविवाहित बेटे/बेटी, पति/ पत्नि, तथा कार्ड में उल्लेखित व्यक्ति इसका लाभ उठा सकते हैं।
लाभ प्राप्त करना - भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत, लाभार्थियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो, सूचीबद्व निजी अस्पतालों के माध्यम से चिकित्सा लाभ मिलेगा।

भामाशाह रोजगार सृजन योजना

बेराजगार युवको को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न बैंको से ऋण प्रदान करना।
पात्रता मापदंड- रजिस्टरर्ड बेरोजगार, महिला (10वी या 12 वी पास ), अनुसूचित जनजाति/ अनुसूचित जाति/ विकलांग सभी श्रेणीयों के लिए लिए ऋण की सीमा अलग-अलग है तथा ब्याज ऋण दर पर सब्सिडी देती है। चुकाने की अधिकतम अवधि 5 वर्श है जिसे बैंक की अनुमति से 6 माह तक बढ़ाया जा सकता है।
भामाशाह रोजगार सृजन योजना के लिए आवेदन करना - वेब साइट से फॉर्म का प्रिंट लेकर दस्तावेज (आय व मूल निवासी, पता के प्रमाण पत्र) जमा कराकर सभी प्रमाण पत्रों की मूल प्रति दिखाकर साक्षात्कार में उत्तीर्ण होकर बैंक खातें में ऋण राशि प्राप्त कर सकते हैं ।

अध्याय 8

राजस्थान में नागरिक सेवाओं तक पहुँच

सिंगल साइन ऑन सुविधा

राजस्थान सरकार ने सिंगल लोग इन इंटरफेस के माध्यम से नागरिकों की सभी विभागों की ई-सेवाओं तक पहॅुच को सरल बनाने के लिए एक पहल की है जिसे एस. एस. ओ. या सिंगल साइन ऑन सुविधा के नाम से जाना जाता है। एस.एस.ओ.सिस्टम में, एक नागरिक राजस्थान सरकार के एक से अधिक विभागों द्वारा की जाने वाली ई-सेवाओं के लिए सिंगल यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग कर लोगिन कर सकते हैं।
1.एस.एस.ओ. (सिंगल साइन ऑन ) का प्रयोजन -
सेवा प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों और हलफनामाओं की कोई जरूरत नहीं
राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की डिजिटल सेवा तक पहुचने के लिए सिंगल विंडो इंटरफेस
2.नागरिक के लोगिन का निर्माण -
पंजीकरण करने के लिए वेबसाइट पर विभिन्न वर्गो जैसे कि
नागरिक - भामाशाह कार्ड/आधार कार्ड /फेसबुक/जी-मेल का उपयोग कर पंजीकरण कर सकते हैं।
उद्योग - उद्योग आधार या व्यापार पंजीकरण नंबर का उपयोग कर पंजीकरण करें ।
सरकारी कर्मचारी - अपनी एम्प्लोय आई डी के द्वारा पंजीकरण (rajister) कर सकते हैं।
पंजीकरण के सत्यापन के लिए ओ टी पी या बायोमेट्रिक विकल्प का प्रयोग कर सकते हैं ओटीपी के लिए मोबाइल नंबर जो आधार के साथ पंजीकृत है उसमें एक एस.एम.एस .प्राप्त होगा तथा ‘‘बायोमेट्रिक विकल्प के उपयोग लिए हमारे कंप्यूटर पर बायोमैट्रिक डिवाइस होनी चाहिए।

नागरिक सेवाएं प्राप्त करना

वेब पोर्टल के माध्यम से ई-मित्र सेवाएं

बिजली /पानी बिल भुगतान - पोर्टल पर अपनी एस एस ओ आई डी से लाॅगिन करे- ई-मित्र आइकन पर क्लिक करें - पे बिल पर क्लिक करें -सर्विस- सब्सक्राइब सर्विस -एडवांस सर्च के द्वारा पानी/बिजली को चुन कर ई-मित्र सी आई डी कोड व के नंबर इनपुट करें। ‘अथवा’ पोर्टल पर अपनी एस एस ओ आई डी से लोगिन करे- सर्विस- एवेलेबल सर्विस -यूटिलिटि - इलेक्ट्रीसीटी टाईप करके डिस्कोम के नम्बर इलेक्ट्रीसीटी बिल सलेक्ट करके के-नम्बर डालकर गेट बिल डिटेल्स पर क्लिक करें- एड बिल फोर पेमेंटस -बिल पे पर क्लिक करें-डेबिट/क्रेडिट कार्ड या ऑनलाईन पेमेंट द्वारा पेमेंट करके रिसिप्ट प्रिंट करें।
मूलनिवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना- पोर्टल पर अपनी एस एस ओ आई डी से लोगिन करें- सर्विस- एवेलेबल सर्विस- एप्लीकेशन सर्विस- bonafide certificate type- भामाशाह या आधार नम्बर करने पर मूलनिवासी आवेदन फॉर्म खुलेगा जिसे भर कर सबमिट बटन पर क्लिक करें। मूलनिवासी प्रिंट करने के लिए Avail Services-Print domicile Certificate पर क्लिक करें-ट्रांजेक्शन आई डी टाईप कर फीस का भुगतान करके प्रिंट पर क्लिक करें।
रोजगार विभाग में पंजीकरण - पोर्टल पर अपनी एस एस ओ आई डी से लोगिन करे- प्रदर्शित डैशबोर्ड में रोजगार विभाग के आइकन पर क्लिक करें – Jobseeker-New Rejistrstion में क्लिक करें प्रदर्शित आवेदन फार्म भर कर Submit पर क्लिक करें।
विश्वविद्यालय में एडमिशन शुल्क भरना - पोर्टल पर अपनी एस एस ओ आई डी से लोगिन करें- सर्विस- एवेलेबल सर्विस- यूटिलिटि - यूनिवर्सिटी को सलेक्ट करके Challan number और जन्मतिथि भर कर GRT Bill Detail पर क्लिक करे-डेबिट क्रेडिट कार्ड या ऑनलाईन पेमेंट द्वारा पेमेंट करके रिसिप्ट प्रिंट करें।

भामाशाह योजना

नागरिक पंजीकरण – Bhamashah.rajasthangov.in वेबसाइट को ओपन कर Citizen Registration पर क्लिक करके Registration को पूरा करे।
नागरिक नामांकन -पोर्टल के होम पेज पर Citizen Registration आइकन /लिंक पर क्लिक करें - पंजीकरण नंबर दर्ज करके सर्च बटन पर क्लिक करें- व्यक्तिगत /बैंक विवरण दर्ज करके सेव बटन पर क्लिक करें-कार्ड इस बैंक खाते से जुड जाएगा।
प्राप्ति रसीद को प्रिंट करना - भामाशाह नांमाकन पोर्टल में Home page पर Acknowledgement Receipt आइकन /विकल्प पर क्लिक करके भामाशाह/आधार/ पंजीकरण संख्या द्वारा प्रिंट आउट ले सकते है।
एक परिवार के सदस्य को जोड़ना – Add member Opation पर क्लिक करके भामाशाह संख्या टाईप करके search पर क्लिक करें - जिस सदस्य को ंकक करना उसकी जानकारी भरें।
दस्तावेज अपलोड करना – Upload Document आइकन /विकल्प पर क्लिक करके भामाशाह संख्या टाईप करके search पर क्लिक करें फाईल सलेक्ट करके अपलोड बटन पर क्लिक करे।
कार्ड का स्टेट्स जांचना - कार्ड स्टेट्स ऑप्शन में अपने भामाशाह पंजीकरण नंबर टाइप करके कार्ड स्थिति देखें।

राजस्थान संपर्क

शिकायत दर्ज करना - पोर्टल में अपनी sso आईडी और पासवर्ड डालकर लोगिन करे - डेसबोर्ड में स्थित Rajsampark आयकन पर क्लिक करने पर आप लोगिन हो जावोगे अन्यथा आपने इस पर पहली बार लोगिन किया है तो आप व्यक्तिगत विवरण भरने के बाद लोगिन हो पाओगे।
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया- Lodge Grievance लिंक पर क्लिक करें। शिकायतकर्ता विवरण, शिकायत क्षेत्र विवरण, शिकायत दर्ज करके Submit बटन पर क्लिक करें - शिकायत संख्या आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आएगी और यह शिकायत दर्ज हो जाएगी ।
शिकायत की स्थिति देखें- राजस्थान संपर्क होमपेज View Stastus पर क्लिक करे।
शिकायत के बारे में फीडबैक भेजें- अपनी शिकायत का निपटारा होने पर राजस्थान संपर्क होमपेज में Feebdack पर क्लिक करे। आप फीडबैक/सजेशन भी सबमिट कर सकते हैं अथवा संतोशजनक समाधान न होने पर शिकायत को Reopen करके दस्तावेज अपलोड़ कर सबमिट बटन दबाएं।

ई -सार्वजनिक वितरण प्रणाली

भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्यान की कमी से निपटने व जरूरतमंद नागरिकों को सस्ती कीमतों पर अनाज वितरण करने नागरिकों के लिए जानकारी और विभिन्न सेवाएं प्रदान करने के लिए http://food.raj.nic.in पोर्टल लोंच किया है।
राशन कार्ड विवरण ढूंढ़ना – पोर्टल (http://food.raj.nic.in) खोले –importrtand link section में View Details of Ration Card And Ration Card Distribution पर क्लिक करें - खुले हुये फार्म में District सलेक्ट करके डिटेल्स भरकर Search बटन पर क्लिक करें और विवरण प्रदर्शित हो जायेगा।
राशन कार्ड आवेदन कि स्थिति को टैªक करना - पोर्टल (http://food.raj.nic.in) खोले - importrtand link section में Ration Card application Status पर क्लिक करें - खुले हुये फार्म में Ration UID Form no सलेक्ट करके डिटेल्स भरकर Search बटन पर क्लिक करें और विवरण प्रदर्शित हो जायेगा।

अध्याय 9

नागरिक केन्द्रित सेवाओं की जानकारी

आधार सेवाएं

भारत के शिशु से वयस्क निवासी अपना फोटोग्राफर, दसों अंगुलियों के बायोमेट्रिक एक केंद्रीकृत डेटाबेस में स्टोर करा कर आधार के लिए निःशुल्क नांमाकन कर 12 अंको का एक विशिष्ट पहचान कार्ड प्राप्त कर सकता है।
आधार कार्ड के लिए पंजीकरण कैसे करें -
किसी भी अधिकृत आधार नामांकन केंद्र पर अथवा नामांकन शिविर में, नामांकनकर्ता या ऑपरेटर आपके दस्तावेजों से विवरण enter कर आपकी तस्वीर (फोटोग्राफ), फिंगर पिं्रट्स और आईरिस स्कैनिंग कर ऑपरेटर या नामांकनकर्ता स्वयं के फिंगरप्रिंट के साथ साइन ऑफ़ करके एनरोलमेंट संख्या और अन्य विवरण के साथ आपका नामांकन कर एक एकनाॅलेजमेंट की पिं्रट देगा।
आधार अपडेशन -

ऑलाइन विधि - http://uidai.gov.in पर रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर प्राप्त OTP से लोगिन कर official aadhar card update portal पर update aadhar data button पर क्लिक करके aadhar self service portal में Name,Gender ,DOB,Address,Mobile,email को अपडेट कर तथा सभी संभावित self –signd/attested डॉक्यूमेंट upload करने पर update reqest number -URN द्वारा confirmetion message प्राप्त होगा और आपका आधार अपडेट हो जायेगा।
ऑफ़लाइन विधि - डाक सेवा का उपयोग करके भी अपडेट किया जा सकता है।

बैंक खाते को आधार के साथ लिंक करना- आवेदन फ़ोर्म को बैंक में जमा करवाये अथवा जिस बैंक खाते को आधार से जोड़ना हो उस बैंक की वेबसाइट ऑपन करके उसमें अपने आई डी व पासवर्ड द्वारा लोगिन करके update aadhar card detail या । aadhar card seeding पर क्लिक करके 12 अंको का आधार नं डालकर सबमिट बटन पर क्लिक करें
आधार से संबधित सुरक्षा- आधार कार्ड नं. या उसकी कोपी को हर किसी के साथ शेयर न करें, आधार की जेरोक्स को सेल्फ अटेस्ट करते समय इस पर डेट व उद्देश्य अंकित करे, विश्वसनीय श्रोतो या साइटों पर ही आधार डिटेल्स शेयर करें।

आयकर विभाग सेवाएं

PAN कार्ड आवेदन – Nsdl (National Securities depository limited )या http://tin.tinnsdl.com /pan /form 49adsc.html से फार्म 49। भरकर डेबिट/क्रेडिट कार्ड यानेट बैंकिंग या चेक डिमांड़ड्राफ्ट से भुगतान शुल्क जमा कराकर aknowledgement receipt प्राप्त करके और फार्म के साथ दस्तावेज अटैच करके इनकम टेक्स डिपाटर्मेंट को भेजें।
PAN कार्ड विवरण में अपडेट- पेन कार्ड आवेदन फॉर्म में परिवर्तन चाहने वाले बोक्सो को tick करके ंचचसल पर क्लिक करे इसमें आपका पेन नम्बर नहीं बदलता है।
म्.पिससपदह वत पदबवउम जंग तमजनतदे - बैंक स्टेट्मेंट, फार्म16 व पिछले साल के रिटर्न की फोटोकोपी के उपयोग से ीजजचरूध्ध्पदबवउमजंगपदकपंमपिससपदहण्हवअण्पद पर चंद के उपयोग से डाउनलोड पेज से प्ज्त् प्रिपरेशन सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर सॉफ्टवेयर से अपनी आय कर भुगतान, कटौती आदि के बारे जानकारी डाल कर सेल्फ-एक्सप्लेनट्री ऑप्शन से गणना द्वारा तैयार रिटर्न को ग्डस् फ़ोरमेट में सेव करें और उसे म.पिससपदह में म.पिसम - नचसवंक तमजनतद . ।ेेमेेउमदज लमंत पर क्लिक कर गउस फाइल का चयन कर सबमिट बटन पर क्लिक करके अपना प्ज्त् भर सकते हैं।
पुरानी प्ज्त् प्राप्त करना- आयकर वेबसाइट पर लोगिन कर टपमू तमजनतदध्वितउ पर क्लिक करें - ंबादवूसमकहमउमदज दनउइमत. प्ज्त्.टध्।बादवूसमकहमउमदज पर क्लिक करके डाउनलोड़ कर सकते हैं।

पासपोर्ट सेवा

स्टेप 1-ूूूण्चंेेचवतजपदकपंण्हवअण्पद पर एकाउंट बनाकर रजिस्टर करें।
स्टेप 2- लोगिन करके थ्तमेीचंेेचवतजध्चंेेचवतज तमपेेनम या कपचसवउंजपब चंेेचवतजध्वििपबपंस चंेेचवतज या चसवपबम बसमंतंदबम बमतजपपिबंजम या पकमदजपजल बमतजपपिबंजम में से आवश्यकतानुसार चुनें।
स्टेप 3-ऑनलाईन फार्म भरें या ऑफलाईन के लिए पासपोर्ट म .वितउ डाउनलोड़ करके भरें।

टिकट बुकिंग सेवाएं

1) - भारतीय रेल

पंजीकरण एवं साईन इन- भ्जजचरूध्ध्पतबजबण्बवण्पद पर ेपहद नच पर क्लिक करके प्रदर्शित फार्म में विवरण व व्यक्तिगत जानकारी भरने के बाद एकाउंट को सक्रिय करनें के लिए मोबाइल पर वेरीफिकेशन कोड़ व ई-मेल आई डी पर एक्टीवेशन लिंक का प्रयोग करके एकाउंट को सक्रिय करें।
पी एन आर (पेसेंजर्स नेम रिकोर्ड) स्टेट्स ट्रैकिंग- ीजजचरूध्ध्ूूूूण्पदकपंतंपसण्हवअण्पद वेबसाइट में च्छत् ैजंजने पर क्लिक करके अपना रेफरेंस नम्बर (10 अंको का यूनिक पी एन आर नम्बर) डालकर ळमज ैजंजने - ठववामक ज्पामज भ्पेजवतल - म्.ज्पबामज ेमसमबज करके ळमज च्छत् ैजंजने पर क्लिक करें।
टिकट के आगमन/प्रस्थान के बारे में पूछताछ - ीजजचरूध्ध्ूूूण्मदुनपतलण्पदकपंतंपसण्हवअण्पदध्दजमे द्वारा हम ट्रेन को स्पॉट करना (ट्रेन की लाइव), लाइव स्टेशन, ट्रेन बिटवनी स्टेशन (दो स्टेशन के बीच उपलब्ध ट्रेने), रेलवे सारणी, केसिंल की गई ट्रेने, री शेडुअल, डायवरटेड (मार्ग परिवर्तित वाली गाडियां) आदि जानकारी ले सकते हैं।
आई आर सी टी सी टिकट बुकिंग- ीजजचरूध्ध्ूूूण्पतबजबण्बवण्पद के होम पेज पर च्संद उल जतंअमस पर क्लिक करे- गंतव्य स्थान डेट फनवजं भर कर थ्पदक ज्तंपदे पर क्लिक करें- ।अंपसंइपसपजल पर क्लिक करें - सीट अवेलेबल हो तो ठववा ज्पबामज पर क्लिक करके रिजर्वेशन फार्म भर कर छमगज पर क्लिक करें- क्रेडिट डेबिट कार्ड या नेट बेकिंग से भुगतान करके अपना टिकट प्रिंट करें।
ई-टिकट रद्द करना- ीजजचरूध्ध्ूूूण्पतबजबण्बवण्पद लोगिन करके ठववामक ज्पबामजे पर क्लिक करके टिकट को सलेक्ट कर बंदबसम पर क्लिक करें।
2) - त्ैत्ज्ब् -

रजिस्ट्रेशन एंड साइन इन- ीजजचरूध्ध्तेबवदसपदमण्तंरंेजींदण्हवअण्पद ऑपन करे - छमू नेमत पर क्लिक करके विवरण भरकर एकाउंट बनाये - अपनी ई-मेल में प्राप्त ।बजपअंजपवद सपदा पर क्लिक करके अकाउंट का एक्टिव करंे
बस समय सारिणी देखंे ;टपमू ठने ेबीमकनसमद्ध -त्ैत्ज्ब् पर लाॅगिन करके ठन्ै म्दुनपतल पर क्लिक करके थ्तवउ - जव और डेट व बस का प्रकार (अथवा ।छल्) डालकर ैमंतबी पर क्लिक करें
टिकट बुकिंग-त्ैत्ज्ब् पर लोगिन करे - बुकिंग पेज खोले- थ्वतउ - जव डेट क्जवच ंितम और पेज ंअंपसंइपसपजल की जांच कर ठववा ज्पबामज पर क्लिक करे- पेसेंजर्स की डिटे्ल्स भरे - पेमेंट करें - अपना टिकट प्रिंट करे
टिकट रद्द करना- त्ैत्ज्ब् पर लोगिन करे - डल ज्पबामज पर क्लिक करें जव बंदबमस पर क्लिक करें-

राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल

;छंजपवदंस टवजमतश्े ैमतअपबम च्वतजंसद्ध
म्ब्प् ;मसमबजपवद बवउउपेेपवद व िपदकपंद्ध मतदाताओं को एकल खिड़की सेवाएं प्रदान करने के लिए ीजजचरूध्ध्ूूूण्दअेचण्पद को जनवरी 2015 में राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर लोंच किया।
1. चुनावी सूची में नाम खोजें-
2. नए पंजी करण के लिए आवेदन करें
3. सुधार के लिए आवेदन करें
4. मतदान केन्द्र, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का विवरण देखना
5. बूथ स्तर के अधिकारी, चुनावी पंजीकरण अधिकारी के संपर्क नम्बर देखते हैं।
6. आधार को म्क्च्प्ब् ;म्समबजपवद पकमदजपजल बंतकद्ध
7. चुनावी प्रक्रिया व इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन म्टडद्ध ;से संबधित ऑडियो विजुअल लघु फिल्म देख सकते हैं।

एल पी जी सेवा और सदस्यता

ऑनलाइन रिफिल बुकिंग- स्च्ळ सिलेंडर को बुक करने के लिए पर्सनली उपस्थित हाने या कॉल करने के बजाय हम घर बैठे एक बटन क्लिक करके कर सकते हैं।
ऑनलाईन बुकींग सर्विस करने के लिए- स्च्ळ चतवअपकमत ;भ्च्ए ठींतंज वत प्दकपंदद्ध की बेवसाईट ऑपन करें- विवरण दर्ज करके रजिस्टर करें- यूजर नेम व पासवर्ड टाईप करके लोगिन करें- ठववाध्त्मपिस पर क्लिक करें-च्ंल वदसपदमध्ब्ंेी वद कमसपअमतल उवकम का प्रयोग करके रिफिल बुक करते ही रजिस्टर्ड मोबाइल या ई-मेल पर कंफर्मेशन प्राप्त हो जायेगा।
पिछले डिलिवरी डेटा की जांच- वेबसाइट पर लोगिन करें- टपमू व्तकमत भ्पेजवतल पर क्लिक करें
वदसपदम तमुनमेज वित कपेजतपइनजवत बींदहम - छमू ैमतअपबम त्मुनमेज पर क्लिक करे ब्राउजर द्वारा डिस्ट्रीब्यूट्र का चयन कर सलेक्ट पर क्लिक करें।
ब्सवेमत ;ेनततमदकमत द्ध व िबवददमबजपवद - सरेन्डर कनेक्शन ऑप्शन प्रयोग करें, डिस्ट्रीब्यूटर स्वयं ही सिलेंडर व रेगुलेटर ले जायेगा।

अध्याय 10...

मोबाईल डिवाईस/स्मार्ट फोन के साथ कार्य करना

हैंडहेल्ड डिवाइस के प्रकार

फीचर फोन- अवायस कालिंग और टेक्स्ट मैसेजिंग, मल्टीमीडिया और इंटरनेट आदि फिचर होते हैं।
स्मार्ट फोन- फोन कॉल्स, टेक्स्ट मैसेज, डिजिटल कैमरा, ई-मेल, स्थान ढॅूढ़ंने व नेविगेशन के लिए जीपीएस, ऑडियो, रिकोर्डिंग, डेट टाईम, अलार्म घड़ी, स्टॉप वाच, टाइमर, वोइस डिक्टेशन, नोट्स, टोर्च लाईट, ई-बुक रीडर, कैलकुलेटर, गेम।
टेबलेट/ टेबलेट कंप्यूटर/ टेबलेट पीसी- यह आमतौर पर स्मार्ट फोन के समान एक पुस्तक ( 7 इंच या बडे़ आकार) का होता है यह लैपटॉप और पीडीए के बीच की एक कड़ी है इसमें स्टायलस या अंगुली से टेप किया जाता है। इनमें वाईफाई होते हैं तथा इनका उपयोग लेपटॉप के समान ही कार्य व उद्देश्य होते हैं तथा कुछ टेबलेट डिटेचेबल की बोर्ड के साथ आते हैं।
फेबलेट- यह एक कंप्यूटिंग डिवाइस है इनकी स्क्रीन 4 से 7 इंच होती है इनमें स्मार्ट फोन के सभी फीचर्स होते हैं।

लोकप्रिय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार

एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम- गूगल ने एस्ट्रो के नाम से सितंबर 2008 में एंड्राॅइड ऑपरेटिंग सिस्टम रिलिज किया तथा इसके बाद अपग्रेड संस्करण बेन्डर, कपकेक, डोनट, एक्लेयर, फ्रोयो, जिंजरब्रेड, हनीकोम्ब, आइसक्रीम सैंडवीच, जेलीबीन, लोलीलीपोप, मार्शमॉलो और नवीनतम् संस्करण में एंड्राइड नोगाट 7.0 है ये मल्टीटास्किंग व स्वैप को स्पोटर् करते हैं।
विंडोज फोन ओ एस- यह माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम है या मेट्रो-व्युत्पन्न यूजर इंटरफेस की सुविधा देता है। उदा.- विंडोज फोन 7, 8, 8.1
एप्पल आई ओ एस- यह मल्टीटच व मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग है जो एप्पल के आईफोन, आईपैड और आई पोड तथा इसका एक विशेष संस्करण एप्पल वाच को भी संचालित करता है। यह एप्पल द्वारा बनाई गई डिवाईसेज को चलाता है दूसरी डिवाईसेज को उपयोग की परमिशन नहीं देता।

स्मार्ट फोन कोन्फिगर करना

स्मार्ट फोन पर गूगल प्ले को कोन्फिगर करना - एंड्राइड बेस्ड स्मार्ट फोन में गूगल प्ले स्टोर को रजिस्टर करने के लिए अपने जी-मेल एकाउंट को रजिस्टर करना होता है। इसके लिए एप लिस्ट खोलकर प्ले स्टोर को टेप करे व एड अ गूगल अकाउंट करके अपना जी-मेल आई डी व पासवर्ड डाले।
एंड्राइड फोन पर एक ऐप इंस्टॉल/अनइंस्टॉल करें- प्ले स्टोर ऑपन करे-ऐप का नाम टाईप करें - सर्च (लैंस ) पर क्लिक करके सर्च करें -प्रस्तुत परिणाम से ऐप चुनकर डाउनलोड़ करके इंस्टॉल करें।
ऐप को डिसेबल अथवा डिलिट करना - किसी ऐप को डिसेबल अथवा डिलिट करने के लिए सेटिंग-एप्लीकेशन मेनेजर से अनइंस्टाल अथवा डिसेबल करे।
ऐप वल्र्ड को एक्स्प्लोर करना - प्लें स्टोर से किसी भी ऐप को केटेगरी या विशेषताओं के आधार पर खोज या जांच सकते हैं जैसे- टॉप पेड, टॉप फ्री, टॉप ग्रासिग, टॉप न्यु फ्री, ट्रेडिंग, गेम, संचार, डेवल्पर, अदर ऐप आदि।
मोबाइल विशिष्टता और कोन्फिगर आवश्यकताएं जांचना-
मोबाइल के बीच फाइल साझा करना - लोकप्रिय ऐप शेयर इट से दो या दो से अधिक डिवाइसों के बीच फाइलों को ट्रांसफर कर सकते हैं। इसके लिए डिवाइस पर शेयर ईट ऐप ऑपन करे सेंड पर क्लिक करके फाईल्स का चयन करके नेक्स्ट पर क्लिक करे फिर दुसरी डिवाइस पर भी शेयर ईट खोलकर रिसीव बटन पर क्लिक करें एक-एक करके फाईल प्राप्त हो जायेगी।
रास्ता खोजने के लिए गूगल मैप का उपयोग करना - गूगल मैप ऐप द्वारा किसी भी स्थान सार्वजनिक भवन, प्रसिद्ध स्थान आदि की लोकेशन देख सकते है। स्टार्टिंग पॉइंट, अथवा करंट लोकेशन से गंतव्य (कमेजपदंजपवद) स्थान का मार्ग बंतध्चनइसपब जतंदेचवतजध्ूंसापदहध्इपबलबसमध्चसंदम आदि के अकोर्डिंग ढूंढ़ सकते हैं।
सेटिंग पेनल ब्लूटूथ- सेटिंग से ब्लूटूथ ऑन करके अन्य सभी उपलब्ध डिवाइसों में से किसी एक को सलेक्ट कर पिन नं. डाल कर छोटी दूरी पर डेटा अथवा नेट शेयर कर सकते है।
जीपीएस - सेटिंग से जी पी एस (ग्लोबल पोजीशिंग सिस्टम) या लोकेशन को ऑन करके नेविगेशन अथवा मैप सेवा का लाभ ले सकते हैं।
मोबाइल डेटा - यदि आपने सिम ऑपरेटर द्वारा डेटा पेक का रिचार्ज कराया है तो आप सेटिंग से मोबाइल डेटा ऑन करके इंटरनेट का प्रयोग कर सकते हैं।
वाई फाई - वाई फाई से इंटरनेट का प्रयोग करने के लिए सेटिंग से वाई-फाई को ऑन करें।
स्क्रीन लॉक सेट करना - अपनी डिवाइस में स्क्रीन लॉक सेट करने के लिए सेटिंग-सिक्यूरिटि-स्क्रीन लॉक कर सकते है, स्क्रीन में निम्न विकल्प होते हैं।
नन (कोई नहीं) - किसी प्रकार का स्क्रीन लॉक नही रखने हेतु।
स्वाइप - स्क्रीन पर स्वाइप करके ऑन या ऑफ़ करना।
पेटर्न - नौ बिन्दुओं की श्रृंखला द्वारा विशिष्ट स्वाइप पेटर्न का निमार्ण करना।
पिन - पर्सनल नम्बर द्वारा लॉक सुविधा का प्रयोग करना
पासवर्ड - डिवाईस में स्वयं के पासवर्ड का चयन करना।
मोबाइल हॉट स्पॉट को कोन्फिगर करना- सेटिंग-मोर-वायरलेस एंड़ नेटवकर्स-टेथरिंग एंड पोर्टेबल हॉटस्पॉट का विकल्प चुनकर अन्य डिवाईस को इंटरनेट शेयर करा सकते है। इसे सुरक्षित करने के लिए पासवर्ड भी लगा सकते हैं।

राजस्थान के नागरिकों के लिए उपयोगी ऐप्स

राजस्थान सम्पर्क - प्ले स्टोर पर राजस्थान सम्पर्क खोज कर इंस्टॉल कर सकते हैं। व इस ऐप के द्वारा हम लोगिन करके स्वकहम लवनत ळतपमअंदबमे से शिकायत दर्ज करना, टपमू ळतपमअंदबम ैजंजने द्वारा शिकायत की स्थिति देखने, तथा शिकायत का रिमांडर भेजना व शिकायत संबंधित फीड बैक व सजेशन दे सकते हैं।
ई-मित्र -प्ले स्टोर पर ई - मित्र खोज कर इंस्टॉल कर सकते है। तथा इस ऐप में हम रजिस्ट्रेशन कर लोगिन करके वन टाईम पेमेंट सर्विज, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री, एडिट प्रोफोइल, स्विच रोल व फीड बेक जैसे कार्य कर सकते है।
भामाशाह योजना - प्ले स्टोर पर भामाशाह ऐप खोज कर इंस्टॉल कर सकते हैं। इसके द्वारा हम पोपुलेशन स्टेटिक्स, एनरोलमेंट स्टेट्स, फब् और एडीटिंग, भामाशाह कार्ड प्रिंटिंग एंड डिस्ट्रीब्युशन, सीडिंग स्टेट्स, भामाशाह डाटा हब, ई-मित्र के माध्यम से नामांकन, एल एस पी वाईज बी सी स्टेट्स आदि।
ईपीडीएस - प्ले स्टोर पर ईपीडीएस ऐप खोज कर इंस्टॉल कर सकते है। इसके द्वारा हम स्टॉक स्टेट्स, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री, सीडिंग स्टेट्स, कोर्डीनेटर डिटे्ल्स, डैली ट्रांजेक्शन रिपोर्ट्।
राज ऐप सेंटर - प्ले स्टोर पर राज ऐप सेंटर खोज कर इंस्टॉल कर सकते है। इसके द्वारा राजस्थान सरकार के सभी ऐप को इसके माध्यम से डायरेक्ट बीना प्ले स्टोर के इंस्टॉल कर सकते है ।

लोकप्रिय ऐप

व्हाट्सऐप- यह एक फ्रीवेयर क्रॉस- प्लेटफार्म और एंड टू एंड एनक्रिप्टेड इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन है। इसके द्वारा हम वोइस कॉल, वीडीयो कॉल, टेक्स्ट मेसेज, इमेजेज, जीआईएफ, वीडियो, दस्तावेज, यूजर लोकेशन, ऑडियो फाईलें, फोन कोंसेप्ट, वोइस नोट्स, भेज सकते हैं, तथा साथ ही इन्हें व्हाट्सऐप ग्रुप व ब्रोडकास्ट द्वारा एक से अधिक व्यक्तियों को एक साथ भेज सकते है ।
फाईल मेनेजर- मोबाइल में उपस्थित फाईलों को अधिक आसानी से ढूढना, परिवर्तन करना, एस डी कार्ड से इंटरनल मेमोरी अथवा इंटरनल मेमोरी से एस डी कार्ड में ट्रांसफर करना, कट, कॉपी, पेस्ट करना, रिनेम, सेंड, शेयर करना, मल्टीपल फाईल सलेक्ट करना, फोटो/म्यूजिक/ वीडीयो को एक स्थान पर संग्रह बनाना, किसी भी ऐप को इंस्टाल व अनइंस्टॉल करनार्, प्च्ए र्7प्च्ए त्।त्ए ज्।त् फाइलो को रीड, ऑपन या एक्सट्रेट करना, फाईलों/ऐप को बुकमार्क अथवा लॉक करना।

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